मुंबई वार्ता संवाददाता

डॉ. कुमार सप्तर्षी ने अपना संपूर्ण जीवन गांधीवादी विचारों और भारतीय संविधान के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित किया। उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारों की विचारधारा तथा हर प्रकार की प्रतिगामी सोच का आजीवन विरोध किया। आज उनके विचारों और उनके संघर्ष को आगे बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। लोकतंत्र, संविधान और गांधीवादी मूल्यों की रक्षा के लिए उनके द्वारा शुरू की गई वैचारिक परंपरा और संघर्ष को आगे ले जाना ही उन्हें सच्ची आदरांजलि होगी। यह प्रतिपादन महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आज पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट में वरिष्ठ समाजवादी नेता, चिंतक तथा युवक क्रांति दल के संस्थापक डॉ. कुमार सप्तर्षी के अंतिम संस्कार में उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


इस अवसर पर गांधी स्मारक निधि के ट्रस्टी तुषार गांधी, अनवर राजन, पूर्व सांसद हुसैन दलवाई, पूर्व विधायक उल्हासदादा पवार, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मोहन जोशी, पुणे शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत जगताप, दीप्ती चौधरी, प्रवीण सप्तर्षी तथा विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि डॉ. कुमार सप्तर्षी महाराष्ट्र के प्रगतिशील वैचारिक जगत के एक प्रकाशस्तंभ थे।
उन्होंने गांधीवाद, भारतीय संविधान और संपूर्ण क्रांति के विचारों को अपने आचरण, विचार, व्यवहार और वाणी में जीवनभर आत्मसात किया। वैचारिक प्रतिबद्धता, सामाजिक उत्तरदायित्व और समाज परिवर्तन के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता ही उनकी वास्तविक पहचान थी। समाज परिवर्तन के लिए उनका योगदान, युवाओं को दी गई वैचारिक दिशा तथा अन्याय के विरुद्ध उनका आजीवन संघर्ष सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।


