मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में खुले मैनहोल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरटीआई ऐक्टिविस्ट संजय तिवारी के अनुसार, न्यूटेक इंफ्रा (Nuteck Infra) को वार्ड क्रमांक 156 से 166 तक कुल 10 परचेज ऑर्डर (P.O.) जारी किए गए थे। प्रत्येक पी.ओ. के तहत 1,000 मैनहोल पर सुरक्षा ग्रिल लगाने का कार्य सौंपा गया था।


संजय तिवारी ने बताया कि इसी तरह ए.एस. कंपनी (A.S. Company) को पूरे एल (L) वार्ड के 1,000 मैनहोलों पर ग्रिल लगाने का ठेका दिया गया था। बताया जा रहा है कि यह कार्य वर्ष 2025 तक पूरा किया जाना था।उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यों के बाद आकाश इंफ्रा (Akash Infra) को मैनहोल पर ग्रिल लगाने के कार्य का निरीक्षण (Inspection) करने के लिए 30 लाख रुपये का अनुबंध दिया गया था।


आरोप है कि जून महीने तक कई मैनहोलों पर ग्रिल नहीं लगी थी, जबकि निरीक्षण एजेंसी की जिम्मेदारी समय पर जांच कर कमियों की रिपोर्ट देना थी।यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि यदि निर्धारित समय पर प्रभावी निरीक्षण किया गया होता और जिन मैनहोलों पर ग्रिल नहीं लगी थी, उन्हें तत्काल सुरक्षित कराया गया होता, तो एक नागरिक की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल, इस मामले में यह सवाल उठ रहे हैं कि ग्रिल लगाने का कार्य समय पर क्यों पूरा नहीं हुआ, निरीक्षण एजेंसी ने क्या रिपोर्ट दी, और संबंधित अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की। मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।


