मनपा और म्हाडा की भूमि निजी संस्था को सौंपने का विरोध।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

एक ही संस्था श्री विलेपार्ले केलवाणी मंडल को 3 भूखंड सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता अनिल गलगली ने म्हाडा तथा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की सार्वजनिक भूमि, मैदानों और खेल सुविधाओं को एक निजी संस्था को सौंपने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। विशेष बात यह है कि दो सार्वजनिक भूखंडों तथा छत्रपति शिवाजी महाराज क्रीड़ा संकुल के संचालन का प्रस्ताव एक ही संस्था श्री विलेपार्ले केलवाणी मंडल को दिए जाने से निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, बृहन्मुंबई महानगरपालिका तथा म्हाडा प्राधिकरण के समक्ष विस्तृत आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने विकास आराखड़े (डेवलपमेंट प्लान) के अनुसार मनोरंजन मैदान (Recreation Ground) हेतु आरक्षित मौजे अंधेरी, सर्वे क्रमांक 195 (भाग), डी.एन. नगर, अंधेरी (पश्चिम) स्थित भूखंड, जिसका वर्तमान में म्हाडा द्वारा सीमेंट गोदाम के रूप में उपयोग किया जा रहा है, तथा सीटीएस क्रमांक 23, लोकमान्य तिलक उद्यान, जे.वी.पी.डी. योजना, विलेपार्ले (पश्चिम) स्थित मैदान को श्री विलेपार्ले केलवाणी मंडल को खेल संबंधी गतिविधियों के लिए सौंपने के निर्णय पर आपत्ति जताई है।

अनिल गलगली के अनुसार सार्वजनिक खुली जगहें, उद्यान और खेल मैदान सभी नागरिकों की साझा संपत्ति हैं। इन्हें किसी एक निजी संस्था को सौंपने से भविष्य में आम नागरिकों के प्रवेश और उपयोग पर प्रतिबंध लगने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जनहित के विरुद्ध है तथा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के मूल सिद्धांत के विपरीत है।

इसके साथ ही उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज क्रीड़ा संकुल, अंधेरी की खेल सुविधाओं के उन्नयन, संचालन, रखरखाव और हस्तांतरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी संस्था को सौंपने के प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक खेल परिसर का संचालन और रखरखाव बीएमसी की जिम्मेदारी है और इसका निजीकरण उचित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सार्वजनिक खुली जगहों का रखरखाव स्थानीय स्वशासी संस्थाओं द्वारा ही किया जाना चाहिए। वहीं मुंबई उपनगर के पालकमंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने विधानमंडल में मुंबई की खुली जगहों, मैदानों और खेल परिसरों को व्यावसायिक उपयोग एवं निर्माण से बचाने के लिए निजी विधेयक प्रस्तुत किया था। मुंबई उपनगर के पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी नागरिकों की भागीदारी से सार्वजनिक खुली जगहों के संरक्षण का समर्थन किया है। इसके अलावा मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम ने भी इस निर्णय का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है।

अनिल गलगली ने दोनों प्रस्तावों को तत्काल स्थगित कर पुनर्विचार करने, निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज, अध्ययन रिपोर्ट और आर्थिक व्यवहार्यता सार्वजनिक करने तथा सार्वजनिक मैदानों, उद्यानों और क्रीड़ा संकुलों का संचालन एवं प्रबंधन बीएमसी के माध्यम से ही जारी रखते हुए सभी नागरिकों के लिए निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि मुंबई की सार्वजनिक खुली जगहें, खेल मैदान और खेल सुविधाएं आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण करना सरकार और स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की संवैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या परोक्ष निजीकरण को रोकना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।

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