मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र में लगातार हो रहे भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पैसे के बल पर अपने विचारों के लोगों को सरकारी व्यवस्था में पहुंचाने के उद्देश्य से संगठित तरीके से पेपर लीक किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अंतर्गत हुई ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मुद्दा उठाया।


मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रोहित पवार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में टीईटी, नीट, एसआरपीएफ, एचएससी केमिस्ट्री, जलसंधारण, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कोतवाल भर्ती, तलाठी भर्ती और महाजेनको सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं की तैयारी गरीब परिवारों के छात्र कड़ी मेहनत से करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एमपीएससी का पूरा पेपर लीक नहीं हुआ था, लेकिन पेपर तैयार करने वाले व्यक्ति से प्रश्नपत्र पहले ही बाहर आ गया था। उनके अनुसार, उसी व्यक्ति ने पैसे लेकर ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा से दो दिन पहले कुछ छात्रों तक पहुंचाए थे।
रोहित पवार ने कहा कि एफडीए में यदि तुकाराम मुंढे जैसे ईमानदार अधिकारी हों तो व्यवस्था बेहतर ढंग से चल सकती है, लेकिन यदि नीचे के स्तर पर नियुक्तियां पैसे के दम पर होंगी तो ऐसे अधिकारी पहले अपनी वसूली करने की कोशिश करेंगे, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इसका गंभीर परिणाम जनता को भुगतना पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की अधिसूचना 29 जुलाई 2025 को जारी हुई थी और परीक्षा 22 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 44,500 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 12 जून को परिणाम घोषित होना था और 22 जुलाई को अस्थायी मेरिट सूची जारी की गई, जिसमें 506 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए तथा 150 उम्मीदवारों का अंतिम चयन हुआ।
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि नंदूरबार स्थित एक कोचिंग संस्थान के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक किया गया। उनके अनुसार, उस संस्थान के छात्रों के पास परीक्षा से दो दिन पहले लगभग 90 प्रतिशत प्रश्न पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि पैसे लेने के बाद संबंधित व्यक्ति व्हाट्सऐप पर प्रश्न भेजता था और कुछ मिनट बाद उन्हें “डिलीट फॉर ऑल” कर देता था। हालांकि, एक छात्र ने सबूत सुरक्षित रखने के लिए उन प्रश्नों को अपने मित्र को भेज दिया, जिसके आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले।
उन्होंने कहा कि उनके पास मूल प्रश्नपत्र और परीक्षा से पहले छात्रों को भेजे गए प्रश्नों के मिलान के प्रमाण हैं। इस पूरे मामले को लेकर उनकी पार्टी जल्द ही एमपीएससी कार्यालय जाएगी और एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे से भी मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जांच एजेंसियों या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच जारी है।


