मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई साइबर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ रैकेट का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 31 कंपनी की मुहरें, 23 सिम कार्ड, 22 चेकबुक, सात बैंक अकाउंट किट, एक कैश काउंटिंग मशीन और बड़ी मात्रा में बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं।


पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि बरामद बैंक खाते देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराध मामलों से जुड़े हुए हैं और इनके माध्यम से साइबर ठगी की रकम की निकासी की जाती थी।
■ सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई
वर्ली स्थित मुंबई साइबर पुलिस के केंद्रीय प्रभाग को 29 जुलाई को सूचना मिली थी कि सलमान पठान और उसके साथी भारतीय ओवरसीज बैंक की बोरीवली या माहिम शाखा से साइबर ठगी की रकम निकालने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने बोरीवली पश्चिम के चंदावरकर रोड स्थित भारतीय ओवरसीज बैंक शाखा में जाल बिछाया।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी चेक के जरिए 10 लाख रुपये निकाल चुके थे और 10 लाख रुपये की एक और निकासी की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने मौके से सलमान पठान सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
■ दो कार्यालयों पर छापेमारी, चार और गिरफ्तार
पूछताछ में आरोपियों ने भायंदर पश्चिम स्थित के.जी.एन. एंटरप्राइजेज और मीरा रोड के रिचा एंटरप्राइजेज नामक कार्यालयों की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों स्थानों पर छापेमारी कर चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के साथ कुल सात आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
■ गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सलमान हबीब पठान (34), साजिद निशार अहमद कोठावाला (46), चिराग केतन टोपरानी (37), सैयद वजाहत वहीदुद्दीन (41), राकेश रामाशंकर मिश्रा (42), रक्षित के. राजेंद्र हेगड़े (35) और आर्यन रितेश ठक्कर (18) के रूप में हुई है।
■ बड़ी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कार्यालयों और घरों से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 31 कंपनी की मुहरें, 23 सिम कार्ड, विभिन्न बैंक खातों से जुड़ी 22 चेकबुक, सात भारतीय ओवरसीज बैंक अकाउंट किट, एक कैश काउंटिंग मशीन, बैंक खाता खोलने के दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां, 11 लोगों के फोटो और सिम कार्ड तथा माहिम और भायंदर से जुड़े दो बैंक खाता खोलने वाले उपकरण जब्त किए हैं।
■ 84 से अधिक साइबर अपराध मामलों से जुड़े खाते
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि बरामद बैंक खातों का इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 84 से अधिक साइबर ठगी के मामलों में किया गया था। आरोपी फर्जी या म्यूल बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों की ठगी की रकम चेक के जरिए निकालने में मदद करते थे।
■ एफआईआर दर्ज, जांच जारी
इस मामले में मुंबई साइबर पुलिस ने एफआईआर संख्या 106/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
■ साइबर पुलिस की नागरिकों से अपील
मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति को संदिग्ध लेन-देन के लिए न करने दें। अनजान व्हाट्सएप या टेलीग्राम समूहों से बचें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और बैंकिंग या पहचान संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
पुलिस ने निवेशकों को केवल SEBI में पंजीकृत सलाहकारों के माध्यम से निवेश करने और धनराशि केवल अपने ही डीमैट खाते में स्थानांतरित करने की सलाह दी है। साथ ही, किसी भी अनधिकृत स्रोत से प्राप्त APK फाइल इंस्टॉल न करने की चेतावनी दी गई है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करे, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करे।


