मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के चर्चित ‘एंटीलिया विस्फोटक’ और उद्योगपति मनसुख हिरेन हत्याकांड में पांच साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुंबई की विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा समेत कुल 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (चार्ज फ्रेम) कर दिए हैं। इसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।


अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। अब गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे और मामले की सुनवाई तेज़ी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।
■ क्या है एंटीलिया और मनसुख हिरेन मामला?
25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर एक लावारिस स्कॉर्पियो वाहन मिला था। जांच में वाहन से जिलेटिन की 20 छड़ें और एक धमकी भरा पत्र बरामद हुआ था, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।
इसके कुछ ही दिनों बाद, 5 मार्च 2021 को इस स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ। हिरेन के परिवार ने आरोप लगाया था कि उनकी हत्या सचिन वाझे और उनके साथियों ने की है।
■ एटीएस से एनआईए को सौंपा गया था मामला
शुरुआत में मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस कर रही थी, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच एनआईए को सौंप दी। जांच के दौरान एनआईए ने सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा, विनायक शिंदे, नरेश गोर, रियाजुद्दीन काजी सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
■ पांच साल बाद ट्रायल की राह साफ
पिछले पांच वर्षों से आरोपियों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज अर्जी और अन्य कानूनी याचिकाओं के कारण आरोप तय करने की प्रक्रिया लंबित थी। अब विशेष एनआईए अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी और गवाहों की गवाही के साथ ट्रायल आगे बढ़ेगा। यह मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक माना जाता है।


