मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में नगरसेवकों के लिए निर्धारित स्वेच्छा निधि को बढ़ाने की मांग सामने आई है। भाजपा की नगरसेविका अश्विनी मते ने महापालिका सभागृह में प्रस्ताव के माध्यम से नगरसेवक स्वेच्छा निधि की वार्षिक सीमा 60 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की मांग की है।
वर्तमान में प्रत्येक नगरसेवक को अपने प्रभाग में विभिन्न नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए हर वर्ष 60 लाख रुपये की स्वेच्छा निधि उपलब्ध कराई जाती है। नगरसेविका अश्विनी मते का कहना है कि मौजूदा राशि प्रभाग की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।


■ महंगाई के कारण बढ़ा काम का खर्च
मते के अनुसार, प्रभागों में सड़क मरम्मत, साफ-सफाई, सार्वजनिक शौचालय, उद्यानों के सौंदर्यीकरण सहित कई जरूरी नागरिक कार्यों के लिए इस निधि का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन महंगाई बढ़ने के साथ निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत में भी काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में 60 लाख रुपये की सीमित निधि से कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।


उन्होंने कहा कि यदि नगरसेवकों की स्वेच्छा निधि बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी जाती है, तो प्रभाग स्तर पर अधिक विकास कार्य किए जा सकेंगे और मुंबईकरों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
■ नगरसेवकों को टैब देने का मुद्दा भी चर्चा में
बीएमसी में नगरसेवकों को टैब उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पहले से ही चर्चा और विरोध का विषय बनी हुई है। इसी बीच स्वेच्छा निधि बढ़ाने की मांग सामने आने से महापालिका में नगरसेवकों से जुड़े खर्च और सुविधाओं को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, नगरसेवकों की स्वेच्छा निधि को 60 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की मांग प्रस्ताव के रूप में रखी गई है। इस पर अंतिम निर्णय महापालिका प्रशासन और संबंधित प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।


