मुंबई वार्ता संवाददाता

मानसून के दौरान मुंबई की सड़कों पर गड्ढों की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। शहर में गड्ढों को भरने और सड़क मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई इलाकों में सड़कें बदहाल हैं। इसी बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के करीब 2 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


मामला ऐसे समय सामने आया है, जब BMC पहले से ही सड़क मरम्मत और गड्ढे भरने पर होने वाले खर्च को लेकर आलोचना झेल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, महानगरपालिका ने पिछले वर्षों में गड्ढों की मरम्मत पर बड़ी रकम खर्च की है। वर्ष 2023-24 में यह खर्च करीब 202 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में घटकर लगभग 156 करोड़ रुपये और 2025-26 में करीब 89 करोड़ रुपये बताया गया था।


■ दो प्रस्तावों से उठे सवाल
अब करीब 2 करोड़ रुपये के दो अलग-अलग प्रस्तावों को लेकर सवाल यह है कि जब मुंबई में बड़े पैमाने पर सड़क कंक्रीटीकरण का काम चल रहा है, तब गड्ढों की मरम्मत के लिए अलग-अलग प्रस्तावों के जरिए इतनी राशि खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
आलोचकों का कहना है कि हर मानसून में गड्ढों की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन बारिश के बाद वही सड़कें दोबारा टूटने लगती हैं। इससे मरम्मत के काम की गुणवत्ता, ठेकेदारों की जवाबदेही और सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े होते हैं।
■ कंक्रीटीकरण के बावजूद गड्ढों का सवाल
BMC का दावा रहा है कि बड़े पैमाने पर सड़क कंक्रीटीकरण के कारण गड्ढों की संख्या और उनकी मरम्मत पर होने वाला खर्च कम हुआ है। जून 2026 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, गड्ढों की मरम्मत पर खर्च 2023-24 के 202 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 89 करोड़ रुपये रह गया।
इसके बावजूद मानसून में कई इलाकों से सड़क खराब होने और गड्ढों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में 2 करोड़ रुपये के नए प्रस्तावों ने महानगरपालिका की सड़क मरम्मत नीति पर बहस तेज कर दी है।
■ जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?
मुंबईकरों का सवाल सीधा है—अगर स्थायी समाधान के लिए सड़क कंक्रीटीकरण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर हर साल गड्ढे भरने के लिए अलग से करोड़ों रुपये क्यों खर्च करने पड़ रहे हैं?
गड्ढों की मरम्मत पर होने वाले खर्च के साथ-साथ यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित सड़कों की मरम्मत कितने समय तक टिकती है, काम की गुणवत्ता की जांच कौन करता है और खराब काम मिलने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
मुंबई में सड़क निर्माण और मरम्मत पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में करीब 2 करोड़ रुपये के इन दो प्रस्तावों को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब BMC प्रशासन से अपेक्षित है, ताकि यह साफ हो सके कि प्रस्तावित खर्च वास्तव में जरूरी सड़क मरम्मत के लिए है या बार-बार होने वाली अस्थायी मरम्मत की उसी पुरानी व्यवस्था का हिस्सा है।


