मुंबई वार्ता संवाददाता

इंस्टाग्राम के जरिए देश की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर अभिभावकों और विद्यार्थियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पवई पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मजे की बात यह है कि सभी आरोपी इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके हैं।
पुलिस ने पुणे में संचालित किए जा रहे दो कथित फर्जी कॉल सेंटरों पर छापा मारकर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 22 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, एक एचपी कंपनी का लैपटॉप, सात डेबिट कार्ड, एक जियो बुक, दो कारें सहित ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों से जुड़ी करीब 24 लाख रुपये की रकम से संबंधित सामग्री जब्त की गई है। जब्त सामान और रकम की कुल कीमत करीब 1 करोड़ 35 लाख 27 हजार रुपये बताई गई है।


पुलिस के अनुसार, मामले की शिकायत श्रीमती ग्रंसी पीटर स्वामी (49) ने की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि इंस्टाग्राम पर techorbit1111 नाम के अकाउंट से विज्ञापन देखकर उन्होंने संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को नामी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश दिलाने वाला बताकर आईआईटी हैदराबाद में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद आरोपियों ने गौतम और सुमीत नाम का इस्तेमाल करते हुए उनसे संपर्क किया और एडमिशन के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपये की रकम लेकर कथित तौर पर आर्थिक ठगी की।


शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी जांच और मानव खुफिया तंत्र की मदद से आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया। जांच में सामने आया कि ठगी से हासिल रकम से आरोपियों ने कई मोबाइल फोन खरीदे थे। मोबाइल की तकनीकी जांच तथा संदिग्धों की गतिविधियों की निगरानी के बाद पुलिस ने पुणे के विमाननगर और लोहेगांव इलाके में कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने नामी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर फर्जी कॉल सेंटर बना रखे थे। छापेमारी के दौरान दोनों कॉल सेंटरों से कॉल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।विमाननगर के कॉल सेंटर से बड़ी संख्या में मोबाइल और सिम जब्तपहला कॉल सेंटर विमाननगर, लोहेगांव, पुणे स्थित निअॉन हाउस बिल्डिंग के कमरा नंबर 204, 404 और 603 में संचालित किया जा रहा था।
यहां से पुलिस ने अलग-अलग कंपनियों के 8 मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड तथा कॉलेज और अन्य संस्थानों के नाम और मोबाइल नंबरों वाले दस्तावेज जब्त किए। इसके अलावा बीएमडब्ल्यू कार और मारुति कंपनी की सियाज कार भी पुलिस ने अपने कब्जे में ली।
खाराड़ी के सिटी विस्टा बिल्डिंग में दूसरा कॉल सेंटरदूसरा कॉल सेंटर पुणे के खाराड़ी स्थित सिटी विस्टा बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, ऑफिस नंबर 12 में चलाया जा रहा था। यहां से 4 मोबाइल फोन, दो हार्ड डिस्क, एक एचपी कंपनी का लैपटॉप, जियो कंपनी की जियो बुक, विभिन्न बैंकों के सात डेबिट कार्ड और छह सिम कार्ड जब्त किए गए। आरोपियों के बैग से भी कुल 13 मोबाइल फोन बरामद हुए।पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके हैं।
उनके कब्जे से कुल 22 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, एक एचपी लैपटॉप, सात डेबिट कार्ड, एक जियो बुक और दो कारें जब्त की गई हैं। आरोपियों द्वारा ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों में करीब 24 लाख रुपये की रकम का भी पता चला है। जब्त किए गए पूरे मुद्देमाल की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 35 लाख 27 हजार रुपये है।
■ ऐसे करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया के दौरान एडमिशन लेने के इच्छुक अभिभावकों और विद्यार्थियों से इंस्टाग्राम विज्ञापनों के माध्यम से संपर्क करते थे। इसके बाद वे अलग-अलग सिम कार्ड और व्हाट्सऐप कॉल का इस्तेमाल कर संबंधित विद्यार्थी या अभिभावक की जानकारी हासिल करते थे।
आरोपी शिक्षण संस्थान के कैंपस या परिसर में जाकर वहां के प्रशासन से अपनी पहचान होने का झूठा भरोसा पैदा करने की कोशिश करते थे। इसके बाद वे अभिभावकों और विद्यार्थियों के सामने खुद को संस्थान से जुड़ा हुआ बताकर विश्वास हासिल करते थे।विश्वास में लेने के बाद आरोपी टोकन अमाउंट, एडवांस या प्रथम वर्ष की शैक्षणिक फीस के नाम पर रकम मांगते थे। जो अभिभावक रकम देने के लिए तैयार नहीं होते थे, उनसे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह करीब 2019 से कॉल सेंटर के माध्यम से एडमिशन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था।कई राज्यों में दर्ज हैं मामलेपुलिस जांच में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र, मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात समेत विभिन्न स्थानों पर कुल छह अपराध दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों से जुड़े पंचनामे में करीब 30 मोबाइल नंबर मिले हैं। इन नंबरों का संबंध PICT (Pune Institute of Computer Technology), NSUT (Netaji Subhas Chandra University of Technology) और DTU (Delhi Technological University) जैसे संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड से होने की संभावना है। पुलिस अब इस संबंध में आगे जांच कर रही है और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े संभावित मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों को 17 अगस्त 2026 को अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 20 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
इस कार्रवाई को पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख, पश्चिम प्रादेशिक विभाग की पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में पवई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक आत्माजी सावंत की टीम ने अंजाम दिया गया। पवई पुलिस की टीम मामले में आगे की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों तथा देशभर में की गई संभावित ठगी का पता लगाने में जुटी है।


