मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की पूर्व महापौर और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की वरिष्ठ नगरसेविका विशाखा राऊत को बड़ा झटका लगा है। पालघर जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने उनका अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया है। यह वही प्रमाणपत्र है, जिसके आधार पर उन्होंने 2026 के मुंबई महानगरपालिका चुनाव में OBC महिला के लिए आरक्षित वार्ड से चुनाव लड़ा था।


राऊत ने BMC चुनाव में वार्ड क्रमांक 191, जिसमें दादर-पश्चिम और शिवाजी पार्क का क्षेत्र शामिल है, से चुनाव लड़ा था। यह सीट OBC महिला के लिए आरक्षित थी। उन्होंने शिवसेना (शिंदे) की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर को हराकर जीत दर्ज की थी। राऊत को 13,236 वोट मिले थे और मुकाबला बेहद करीबी रहा था।


जाति जांच समिति ने उनके OBC प्रमाणपत्र को क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) से जुड़ी आपत्ति के आधार पर अमान्य किया है। प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद अब उनके नगरसेवक पद पर भी संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उनका चुनाव OBC आरक्षित सीट से हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, जाति जांच समिति का आदेश BMC प्रशासन और चुनाव विभाग के पास पहुंचने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद नगरसेवक पद से अयोग्यता की कार्रवाई की जा सकती है और अंतिम निर्णय BMC की प्रक्रिया के तहत घोषित किया जाएगा।
विशाखा राऊत ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके परिवार का पैतृक गांव पालघर जिले में है और उनके पास पुरानी पीढ़ियों से संबंधित जाति प्रमाणपत्र के दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि पालघर के अधिकारियों को उनके मामले में इस तरह का निर्णय लेने का अधिकार है या नहीं।
राऊत के मामले में अपील का रास्ता भी खुला है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें निर्णय के खिलाफ अपील करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। इसलिए जाति प्रमाणपत्र रद्द होने के बावजूद उनके नगरसेवक पद पर अंतिम स्थिति आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
यह घटनाक्रम मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष, खासकर शिवसेना (UBT), के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी जाति प्रमाणपत्र की वैधता से जुड़े मामलों में विपक्ष के कुछ नगरसेवकों पर कार्रवाई हो चुकी है। राऊत के मामले में अंतिम फैसला आने तक उनकी ओर से संभावित अपील और BMC की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।


