मुंबई वार्ता संवाददाता

रक्षाबंधन के अवसर पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की विशेष स्कूलों के दिव्यांग विद्यार्थियों द्वारा हाथों से तैयार की गई राखियों को मुंबईकरों ने जमकर पसंद किया। महानगरपालिका मुख्यालय सहित विभिन्न प्रशासनिक विभाग कार्यालयों में आयोजित राखी प्रदर्शन में दो दिनों के दौरान कुल 2,052 राखियों की बिक्री हुई। राखियों और अन्य वस्तुओं की बिक्री से कुल 51,190 रुपये की राशि जमा हुई। विशेष बात यह रही कि बिक्री से प्राप्त पूरी राशि विद्यार्थियों को ही प्रोत्साहन के रूप में भेंट की गई।


महानगरपालिका की शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर के मार्गदर्शन तथा महिला एवं बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष मीनल तुर्डे की संकल्पना और नियोजन विभाग के माध्यम से रक्षाबंधन के अवसर पर यह विशेष राखी प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ महानगरपालिका की विशेष स्कूलों के दिव्यांग विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देना, उनकी कला को प्रोत्साहित करना और आत्मविश्वास बढ़ाना था।
■ हाथों से बनाई राखियों को मिली खास पसंद
महानगरपालिका की विभिन्न विशेष स्कूलों के विद्यार्थियों ने आकर्षक और रचनात्मक राखियां स्वयं तैयार की थीं। इन्हें महानगरपालिका मुख्यालय के अलावा विभिन्न प्रशासनिक विभाग कार्यालयों में बिक्री के लिए रखा गया था। अपने भाई-बहनों के लिए राखियां खरीदने पहुंचे मुंबईकरों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार राखियों को खूब पसंद किया और उनके हुनर की सराहना भी की।
24 अगस्त 2026 को महानगरपालिका मुख्यालय सहित विभिन्न प्रशासनिक विभाग कार्यालयों में कुल 1,299 राखियां बिकीं। राखियों तथा अन्य वस्तुओं की बिक्री से इस दिन 31,475 रुपये की राशि जमा हुई। वहीं 25 अगस्त 2026 को विभिन्न विभाग कार्यालयों में 753 राखियों की बिक्री हुई और अन्य वस्तुओं सहित 19,715 रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस तरह दो दिनों में कुल 2,052 राखियां बेची गईं और कुल 51,190 रुपये जमा हुए।
■ विद्यार्थियों को मिला मेहनत का सीधा प्रोत्साहन
इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाई वस्तुओं की बिक्री का प्रत्यक्ष अनुभव लिया और उससे प्राप्त राशि का लाभ भी उन्हें ही मिला। उनकी मेहनत के बदले मिली यह आर्थिक सराहना केवल धनराशि तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे विद्यार्थियों के भीतर यह विश्वास मजबूत हुआ कि उनकी कला और मेहनत का मूल्य है।
महानगरपालिका मुख्यालय में एस.जी. बारवे, लायंस जुहू सेंटर और नारे पार्क स्कूलों के विद्यार्थियों ने राखियों की बिक्री में हिस्सा लिया। इसके अलावा एम/पूर्व, डी, एफ/दक्षिण, जी/दक्षिण, जी/उत्तर, एच/पूर्व, एच/पश्चिम, के/पश्चिम, पी/दक्षिण, आर/दक्षिण, आर/मध्य, एफ/उत्तर, एल, एन, एस, टी और एम/पश्चिम प्रशासनिक विभाग कार्यालयों में भी महानगरपालिका की विभिन्न विशेष स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
■ राखी बनी विद्यार्थियों के आत्मविश्वास का प्रतीक
इस आयोजन में राखी केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं रही, बल्कि दिव्यांग विद्यार्थियों की मेहनत, प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का प्रतीक भी बनी। अपनी बनाई राखियों को मुंबईकरों द्वारा पसंद किए जाने और खरीदते हुए देखकर विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ नजर आया।
बीएमसी की ओर से दिव्यांग विद्यार्थियों की कला और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, उन्हें अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का मंच उपलब्ध कराने तथा स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए ऐसे उपक्रमों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। राखी प्रदर्शन को मुंबईकरों से मिले उत्स्फूर्त प्रतिसाद ने यह संदेश दिया कि सही अवसर और मंच मिले तो हर हाथ अपनी प्रतिभा से कुछ सुंदर और सार्थक रच सकता है।


