■ धनुष-बाण चुनाव चिन्ह फ्रीज करने की मांग पर भड़के शिंदे; बोले- न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा, जल्द होगा दूध का दूध और पानी का पानी।
मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

शिवसेना पार्टी और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी उबाठा की ओर से धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने की मांग किए जाने पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।


दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, “हम किसी दूसरे दल में नहीं गए हैं। हम शिवसेना में ही हैं और शिवसेना का ही मुख्यमंत्री बना है। हम किसी तीसरे दल में नहीं गए और न ही हमने दल-बदल किया है। बहुमत के साथ हम शिवसेना में ही हैं।”


■ ‘बालासाहेब कहते थे, शिवसेना कांग्रेस नहीं बन सकती’
शिवसेना में असंतोष और खुद को असली शिवसेना बताने के दावे को लेकर शिंदे ने उबाठा का नाम लिए बिना निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे हमेशा स्पष्ट रूप से कहते थे कि शिवसेना अपनी विचारधारा से अलग नहीं हो सकती और कांग्रेस के साथ नहीं जा सकती।
शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कहा करते थे कि उनकी शिवसेना कभी अपनी विचारधारा से अलग नहीं हो सकती और कांग्रेस नहीं बन सकती। अगर ऐसा हुआ तो वे अपनी “दुकान बंद” कर देंगे।
शिंदे ने कहा कि इसके बाद क्या हुआ, यह पूरे महाराष्ट्र ने देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की विचारधारा और संविधान में बदलाव किए गए। पार्टी में चुनाव कराने के बजाय नियुक्तियां की गईं और मनमाने फैसले लिए गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत सबसे महत्वपूर्ण होता है।
■ ‘पहले बालासाहेब के विचार, फिर हिंदुत्व और अब धनुष-बाण फ्रीज करने की मांग’
धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने की मांग पर भी शिंदे ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “पहले बालासाहेब के विचारों को फ्रीज किया गया, फिर हिंदुत्व को फ्रीज किया गया और अब धनुष-बाण को फ्रीज करने की मांग की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। शिंदे ने विश्वास जताया कि अंततः “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा।
संविधान खतरे में होने की बात करने वालों को पहले अपनी पार्टी के भीतर की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए, ऐसा तंज भी शिंदे ने कसा।
■ ‘80 प्रतिशत समाजसेवा, 20 प्रतिशत राजनीति’
शिंदे ने शिवसेना के संगठनात्मक विस्तार की रणनीति की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए 80 प्रतिशत समाजसेवा और 20 प्रतिशत राजनीति के मंत्र के साथ जमीनी स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला आघाड़ी और युवासेना को अधिक सक्रिय करने के साथ जिला प्रमुख से लेकर बूथ प्रमुख तक संगठन को मजबूत करने का काम अगले दो महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
■ एनडीए के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी
आगामी चुनावों को लेकर शिंदे ने कहा कि शिवसेना एनडीए के रूप में चुनाव लड़ेगी। जहां आवश्यकता होगी, वहां भाजपा और अन्य सहयोगी दलों की मदद की जाएगी। वहीं, जिन सीटों पर शिवसेना की मजबूत स्थिति है, उन सीटों का प्रस्ताव एनडीए के सामने रखा जाएगा।
■ 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जनहित के कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक पूरे महाराष्ट्र में जनता से जुड़े विभिन्न सामाजिक और जनहित के कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। शिंदे ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के बीच सक्रिय रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
■ मराठा आरक्षण पर शरद पवार पर निशाना
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भी एकनाथ शिंदे ने अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में मंडल आयोग के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार के नेतृत्व में मराठा समाज को ओबीसी में शामिल करने का अवसर था, लेकिन उस समय कोई फैसला नहीं लिया गया।
शिंदे ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद महायुति सरकार ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर काम शुरू किया। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मराठा समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण देने, कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने और करीब 5,200 नौकरियों से जुड़े मामलों पर फैसले लिए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी समाज के आरक्षण को कम किए बिना और संविधान के दायरे में मराठा समाज की जायज मांगों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


