मुंबई वार्ता संवाददाता

देश में सार्वजनिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को और मजबूत करने तथा परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित, जवाबदेह एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), मुंबई और विद्यार्थी निधि ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में ‘सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार : गोलमेज परिषद’ का आयोजन किया गया। रामनारायण रुईया महाविद्यालय, माटुंगा के परिषद कक्ष में आयोजित इस परिषद में परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम में अभाविप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रा. मंदार भानुशे तथा आईआईएम मुंबई के निदेशक श्री मनोज तिवारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा मुंबई के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापक, सीनेट सदस्य, प्राचार्य, संस्थाचालक, परीक्षा नियंत्रक, विद्यार्थी प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सहभागिता की।


हाल के वर्षों में नीट जैसी बड़े पैमाने पर आयोजित परीक्षाओं को लेकर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, परिणामों में पारदर्शिता, शिकायत निवारण और परीक्षा तंत्र की जवाबदेही जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। परिषद में इस बात पर जोर दिया गया कि परीक्षा सुधार केवल प्रश्नपत्र या परीक्षा पद्धति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन, परिणाम घोषणा और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया में सुधार आवश्यक है।
अभाविप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रा. मंदार भानुशे ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विद्यार्थियों का संस्थागत व्यवस्था पर विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। परीक्षा केवल विद्यार्थियों की स्मरणशक्ति जांचने का माध्यम न होकर उनके आकलन, आलोचनात्मक चिंतन, कौशल, रचनात्मकता और ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग की क्षमता का समग्र मूल्यांकन करने वाली होनी चाहिए। उन्होंने प्रभावी परीक्षा सुधारों के लिए सरकार, परीक्षा संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के समन्वित प्रयासों को जरूरी बताया।
आईआईएम मुंबई के निदेशक मनोज तिवारी ने संस्थान की परीक्षा व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण, सुरक्षा, परीक्षा संचालन, नियंत्रण एवं सत्यापन, मूल्यांकन और परिणाम घोषणा की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों के उचित विभाजन, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और बहुस्तरीय सत्यापन प्रणाली के जरिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उपाय बताए।
परिषद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर भी चर्चा हुई। डिजिटल परीक्षा प्रणाली, सुरक्षित ऑनलाइन मंच और तकनीक आधारित मूल्यांकन के साथ विद्यार्थियों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने रटने पर आधारित परीक्षा के बजाय क्षमता एवं अनुप्रयोग आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। विद्यार्थियों की समस्या-समाधान क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, विषय की समझ और व्यावहारिक ज्ञान को परखने वाली परीक्षा पद्धति विकसित करने के साथ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को अधिक महत्व देने की बात कही गई।
परिषद में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समान अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। परीक्षा से जुड़े मानसिक दबाव को कम करने के लिए विद्यार्थी सहायता एवं परामर्श व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया गया।
बैठक में प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा एवं परिणाम प्रक्रिया में जवाबदेही, सुरक्षित डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल, एआई के साथ मानवीय निगरानी, समयबद्ध शिकायत निवारण, क्षमता आधारित मूल्यांकन, समावेशी परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थी सहायता तंत्र को मजबूत करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
गोलमेज परिषद को पारंपरिक व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान पर आधारित रखा गया। विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए।
आयोजकों के अनुसार परिषद में प्राप्त सुझावों और सिफारिशों के आधार पर कार्यान्वयन योग्य एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसे संबंधित सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, परीक्षा मंडलों और नीति-निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यक्रम में अभाविप कोकण प्रदेश अध्यक्ष वैद्य कैलास सोनमनकर, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अपर्णा कुलकर्णी, मुंबई महानगर अध्यक्ष प्रा. संदीप शिंदे, मंत्री अभिषेक पवार और संगठन मंत्री श्री अमित पटले भी उपस्थित रहे।


