रूस से तेल खरीद पर 100% अमेरिकी कर के खतरे पर मोदी सरकार देश को स्पष्टीकरण दे: महेश तपासे।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर लगाए जाने की संभावित कार्रवाई के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने केंद्र सरकार से भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता महेश तपासे ने कहा कि सरकार को निर्यात, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की कीमतों पर इसके संभावित असर की विस्तृत जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को रूस से संबंधित नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। कानून के तहत रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदार देशों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक कर लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिला है। हालांकि, यह कर भारत पर स्वतः लागू नहीं हुआ है। कानून में निर्धारित शर्तें पूरी होने पर कार्रवाई की जा सकती है और शीर्ष आयातक देशों की सूची की समीक्षा हर 180 दिन में की जानी है।


महेश तपासे ने कहा कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और इसलिए इस कानून से भारत के व्यापार पर संभावित प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि भारतीय निर्यातकों और रोजगार को संभावित अमेरिकी कर से बचाने के लिए क्या ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जा रहे हैं।


तपासे ने कहा कि यदि अमेरिकी दबाव के कारण भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करनी पड़ती है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैकल्पिक स्रोतों से तेल की आपूर्ति ऐसे दाम पर हो, जिससे उसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन कीमतों को लेकर सरकार की वैकल्पिक योजना सार्वजनिक करने की मांग की।


उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त तथा विदेश मंत्रालयों से यह भी सवाल किया कि अमेरिका के साथ भारत के संबंधों के बावजूद संभावित 100 प्रतिशत कर से स्थायी छूट या द्विपक्षीय सुरक्षा हासिल करने के लिए सरकार ने क्या कूटनीतिक प्रयास किए हैं।


तपासे ने कहा कि भारत को एक ओर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल की खरीद जारी रखने और दूसरी ओर अमेरिकी बाजार में संभावित अतिरिक्त कर के खतरे के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है। भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपूर्ति स्रोतों में विविधता बनाए रखेगी।


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने केंद्र सरकार से निर्यातकों और रोजगार पर संभावित प्रभाव, वैकल्पिक तेल आपूर्ति, ईंधन कीमतों पर नियंत्रण, अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत और आम जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।


महेश तपासे ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से इस संभावित कर के क्षेत्रवार प्रभाव और सरकार की तैयारियों के बारे में देश की जनता को जानकारी देंगे या नहीं।

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