मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता महेश तपासे ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए केंद्र सरकार और एनपीसीआई से इस शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की है।


महेश तपासे ने कहा कि सरकार वर्षों से डिजिटल इंडिया और यूपीआई को आम लोगों के लिए मुफ्त, तत्काल और सशक्त बनाने वाली व्यवस्था के रूप में पेश करती रही है। अब जब यूपीआई देश की खुदरा अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है, तब छोटे कारोबारियों से शुल्क लेने का निर्णय उनके साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छोटे व्यापारियों ने यूपीआई को लोकप्रिय बनाया, अब उसी व्यवस्था के जरिए उन पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।


■ सरकार के दो अलग-अलग नियम
तपासे ने वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों से जुड़े भारी-भरकम कर्जों की वसूली के मामले में सरकार ने नरमी दिखाई, जबकि 2,500 रुपये का यूपीआई भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे किराना दुकानदार या सब्जी विक्रेता पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों में यह संदेश जा रहा है कि बड़े लोगों के लिए राहत और छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त बोझ की व्यवस्था है।
■ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुनाफे का हवाला
तपासे ने वित्त मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल 1.98 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा कमाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी क्षेत्र के बैंक इतनी बड़ी कमाई कर रहे हैं, तो छोटे व्यापारियों से यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर वसूलने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि इस शुल्क का भार अंततः छोटे दुकानदारों, स्थानीय व्यापारियों और चाय-नाश्ते की दुकानों जैसे छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है, जिनके पास बड़े कारोबारियों की तरह शुल्क को लेकर मोलभाव करने की क्षमता नहीं होती।
■ अमीर उद्योगपतियों की दोस्त है मोदी सरकार
तपासे ने मोदी सरकार पर बड़े उद्योगपतियों के हितों की रक्षा करने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे कारोबारियों के प्रति कठोर रुख अपना रही है, जबकि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज और उनके हितों से जुड़े मामलों में अलग रवैया दिखाई देता है।
एनसीपी (एसपी) ने केंद्र सरकार और एनपीसीआई से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। तपासे ने कहा कि यूपीआई को सार्वजनिक डिजिटल सुविधा के रूप में विकसित किया गया है और इसे सरकार या बैंकिंग क्षेत्र के लिए राजस्व का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छोटे व्यापारियों पर यह शुल्क लागू होने से पहले ही निर्णय वापस लिया जाए।


