मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने टाटा समूह (Tata Group) के हालिया घटनाक्रमों और उसके कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि टाटा समूह की समृद्ध विरासत और परोपकारी परंपरा को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है।


प्रमुख बिंदु:
1. टाटा समूह की परोपकारी विरासत
संस्थापकों का दृष्टिकोण: जमशेदजी टाटा, सर दोराबजी टाटा और सर रतन टाटा के दूरदर्शी नेतृत्व में यह विचार स्थापित हुआ कि उद्योग से अर्जित संपत्ति समाज के कल्याण में लगाई जानी चाहिए।
ट्रस्ट की भूमिका: समूह की अधिकांश हिस्सेदारी (लगभग 66%) टाटा संस में ‘टाटा ट्रस्ट्स’ (जैसे सर रतन टाटा ट्रस्ट, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट) के पास है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभांश का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण आजीविका जैसे सार्वजनिक हित के कार्यों में हो।
2. महाराष्ट्र से संबंध और संस्थानों का महत्व
महाराष्ट्र का गौरव: टाटा समूह की इस समृद्ध विरासत का केंद्र महाराष्ट्र रहा है।
प्रमुख संस्थान: मुंबई स्थित ‘टाटा मेमोरियल अस्पताल’, ‘टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR)’, ‘टाटा सामाजिक विज्ञान संस्था (TISS)’, और ‘नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA)’ जैसे संस्थान टाटा ट्रस्ट के सहयोग से खड़े हुए हैं।
संस्थानों पर असर: शरद पवार का कहना है कि यदि ट्रस्ट की भूमिका कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर इन महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी संस्थाओं पर पड़ेगा।
3. टाटा संस के बोर्ड फैसले और विवाद
एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति: 17 सितंबर 2026 को टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन. चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से अगले 5 वर्षों के लिए कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पुनर्नियुक्त करने का निर्णय 4 बनाम 1 के बहुमत से लिया। इसके अलावा, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (List) करने की दिशा में कदम उठाने को भी मंजूरी दी गई।
■ ट्रस्ट निदेशकों में मतभेद:
टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष श्री नोएल टाटा ने इन दोनों प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया।
ट्रस्ट द्वारा नामित दूसरे निदेशक श्री वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया।
■ कानूनी व नियमों का उल्लंघन: पवार के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। कंपनी के नियमों (Articles of Association) के अनुसार, अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए बैठक में उपस्थित ट्रस्ट-नामित निदेशकों के बहुमत (सहमति) की आवश्यकता होती है। उस समय केवल दो ऐसे निदेशक उपस्थित थे, इसलिए बहुमत के लिए दोनों की सहमति आवश्यक थी। अतः ट्रस्ट्स के अनुसार यह निर्णय शुरुआत से ही अमान्य (Invalid) है।
4. कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों का पालन
शरद पवार ने जोर देकर कहा कि कॉरपोरेट गवर्नेंस के तहत कंपनी का कामकाज उसके तय उप-नियमों (Articles of Association) के अनुसार ही चलना चाहिए।
टाटा ट्रस्ट्स के पास शेयरधारकों और जनहित के संरक्षण के लिए जो विशेष अधिकार (सहमति अधिकार) हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए, जैसा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णयों में माना है।
उन्होंने अपील की कि ऐसे मुद्दों को विवाद के बजाय उचित वैधानिक प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।


