मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मालाबार हिल में प्रस्तावित वैकल्पिक जलाशय की संशोधित योजना और संरचनात्मक डिजाइन की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा के लिए आईआईटी रुड़की को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। बीएमसी की स्थायी समिति ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। समीक्षा के लिए आईआईटी रुड़की को 22 लाख रुपये, जीएसटी अतिरिक्त का भुगतान किया जाएगा।


बीएमसी के अनुसार, मालाबार हिल स्थित मौजूदा जलाशय के जीर्णोद्धार के दौरान जलापूर्ति बनाए रखने के लिए पास में एक वैकल्पिक जलाशय बनाने की योजना तैयार की गई है। संशोधित योजना के तहत 5.2 करोड़ लीटर क्षमता वाला तीन-स्तरीय जलाशय मौजूदा जलाशय के पश्चिमी हिस्से में, हैंगिंग गार्डन के पीछे बनाया जाना प्रस्तावित है। इस स्थल पर फिलहाल बीएमसी के कर्मचारियों के आवास और एक पंपिंग स्टेशन मौजूद हैं। प्रस्ताव में नया वाल्व गैलरी बनाने का भी प्रावधान है।


मालाबार हिल जलाशय को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। मूल योजना में पुराने जलाशय को तोड़कर नया जलाशय बनाने का प्रस्ताव था, जिसके चलते बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। करीब दो वर्ष पहले आईआईटी रुड़की की तकनीकी जांच में मौजूदा जलाशय की मरम्मत की संभावना पर भी विचार किया गया था।
नई योजना में पेड़ों पर प्रभाव कम करने का दावा किया गया है। बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त विपिन शर्मा के अनुसार, पहले प्रस्ताव में 389 पेड़ों के प्रभावित होने की बात थी, जिसे संशोधित योजना में काफी कम किया गया है। हालांकि, हालिया निरीक्षण में प्रभावित होने वाले पेड़ों की संख्या 76 से बढ़कर 82 हो गई है, क्योंकि उद्यान विभाग ने कुछ छोटे पेड़ों को भी सूची में शामिल करने को कहा है।
विपक्षी सदस्यों ने पेड़ों के नुकसान को लेकर चिंता जताई है। कांग्रेस के नेता और बीएमसी नगरसेवक अशरफ आजमी ने कहा कि करीब 82 पेड़ प्रभावित होंगे, लेकिन नए जलाशय के आसपास हरित क्षेत्र को किस तरह बहाल किया जाएगा, इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है। मनसे के बीएमसी नेता यशवंत किलेदार ने भी पेड़ों के नुकसान पर आपत्ति जताई।
बीएमसी ने आईआईटी रुड़की का चयन बिना निविदा प्रक्रिया के करने का प्रस्ताव रखा है। निगम का कहना है कि परियोजना की तकनीकी जटिलता और संस्थान की विशेषज्ञता को देखते हुए यह स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा आवश्यक है। समीक्षा के बाद संशोधित परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और डिजाइन पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।


