श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा सिनेमाघरों और मनोरंजन कार्यक्रमों पर ‘पर-शो एंटरटेनमेंट टैक्स’ (प्रति शो मनोरंजन कर) में की गई भारी वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। AICWA के अध्यक्ष इं. सुरेश श्यामल गुप्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस प्रस्तावित टैक्स वृद्धि को तुरंत रोकने और वापस लेने की गुहार लगाई है।


टैक्स में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
बीएमसी कमिश्नर श्रीमती अश्विनी भिड़े द्वारा प्रस्तावित इस नई योजना के तहत सिनेमाघरों और अन्य कार्यक्रमों पर टैक्स की दरों में भारी वृद्धि की बात कही गई है:
एसी सिनेमाघर (AC Cinemas): प्रति शो टैक्स ₹60 से बढ़ाकर सीधे ₹400 करने का प्रस्ताव है।
सिंगल-स्क्रीन एसी सिनेमाघर: प्रति शो टैक्स ₹200 करने का प्रस्ताव है।
नॉन-एसी सिनेमाघर (Non-AC Cinemas): टैक्स ₹45 से बढ़ाकर ₹90 प्रति शो करने का प्रस्ताव है।
नाटक/जलसा एवं मनोरंजन कार्यक्रम: टैक्स ₹25 से बढ़ाकर ₹100 करने का प्रस्ताव है।
सर्कस और मेला/फन-फेयर (Circuses & Fun-fairs): वर्तमान ₹50 की दर को भी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।


फिल्म उद्योग की वर्तमान स्थिति पर असर
पत्र में एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के बाद से बॉलीवुड और क्षेत्रीय मराठी फिल्म उद्योग दोनों ही संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
फिल्मों का निर्माण कम हो गया है और भारी निवेश के बावजूद कई फिल्में अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रही हैं।
OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के कारण सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या (footfall) में भारी गिरावट आई है।
थिएटर मालिक, निर्माता, कर्मचारी, तकनीशियन, जूनियर आर्टिस्ट और वितरक सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। टैक्स बढ़ने से टिकट के दाम आम जनता की पहुंच से बाहर हो जाएंगे, जिससे सिनेमाघरों में दर्शक और घटेंगे और पूरा उद्योग ठप हो जाएगा।


AICWA की मुख्य मांगें
टैक्स वृद्धि पर तुरंत रोक: एसोसिएशन ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि बीएमसी के इस अन्यायपूर्ण और गुमराह करने वाले फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए।
टैक्स में कटौती: AICWA का सुझाव है कि टैक्स बढ़ाने के बजाय इसमें और कमी की जानी चाहिए ताकि थिएटर मालिकों को राहत मिले और दर्शकों को सस्ते दामों पर फिल्में देखने का मौका मिले। इससे निर्माण बढ़ेगा और लाखों सिने कर्मचारियों को रोजगार मिलेगा।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कई सिनेमाघर बंद होने के कगार पर आ जाएंगे और लाखों कर्मचारियों व उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा जाएगा।


