मुंबई वार्ता संवाददाता

गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। माझगांव इलाके में विसर्जन के लिए जा रहे गणपति बप्पा की शोभायात्राओं का मुस्लिम समुदाय के लोगों ने स्वागत और सत्कार किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को भोजन, पानी और शीतल पेय उपलब्ध कराया गया तथा आतिशबाजी के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी गई।


माझगांव में ‘मानकेश्वरचे लाडले’ गणपति के विसर्जन जुलूस के दौरान यह भाईचारा विशेष रूप से देखने को मिला। बताया गया कि माझगांव के हबीब विला बिल्डिंग के निवासी पिछले कई वर्षों से गणपति विसर्जन के दौरान आने वाले मंडलों और श्रद्धालुओं का स्वागत करते आ रहे हैं। पूरे परिसर के लोग मिलकर बप्पा के दर्शन करते हैं और विसर्जन जुलूस का उत्साहपूर्वक स्वागत करते हैं।


इस परंपरा में अफजल खान का परिवार भी पिछले 22 वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। गणपति विसर्जन के अवसर पर उनके घर और परिसर में गणपति भक्तों के लिए सत्कार की व्यवस्था की जाती है। श्रद्धालुओं को खाना, पीने का पानी और कोल्ड ड्रिंक उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही आतिशबाजी कर गणपति बप्पा का धूमधाम से स्वागत और सम्मान किया जाता है।
इस दौरान हबीब विला बिल्डिंग के लोगों ने भी उत्साह के साथ गणपति भक्तों का स्वागत किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक स्थानीय निवासी इस आयोजन में शामिल हुए। गणपति जुलूस के दौरान ढोल-ताशों और जयघोष के बीच मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा किए गए स्वागत ने आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता मारिया भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी इस भाईचारे के माहौल में सहभागिता की।
मुंबई में गणपति उत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का अवसर भी बनता है। माझगांव में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इसी आपसी सम्मान और सद्भाव को सामने लाती है। गणपति विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा बप्पा के स्वागत और विदाई में शामिल होने की तस्वीरें भी सामने आईं।
माझगांव की यह पहल संदेश देती है कि धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन आपसी सम्मान, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव मुंबई की साझा संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गणपति बप्पा की विदाई के मौके पर मुस्लिम परिवार द्वारा 22 वर्षों से किया जा रहा सत्कार इसी परंपरा की एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।


