मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में सूखे का संकट गंभीर होता जा रहा है। किसानों की फसलें प्रभावित हैं और वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार ने निरीक्षण दौरे करने के बाद सूखा घोषित तो कर दिया, लेकिन किसानों तक राहत पहुंचने का अब तक कोई अता-पता नहीं है। सर्वेक्षण, पंचनामे और केंद्रीय दल के निरीक्षण के नाम पर चल रही प्रक्रिया बंद कर सरकार दशहरे से पहले किसानों के खातों में प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता सीधे जमा करे। साथ ही किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए और विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस भी माफ की जाए। यह मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है।


हर्षवर्धन सपकाल ने जलगांव और धुले जिलों के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और प्रभावित किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष सूखे का संकट बेहद गंभीर है। राज्य में 50 प्रतिशत से भी कम बारिश होने के कारण किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऐसी परिस्थिति में सरकार को किसानों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, लेकिन राहत देने के बजाय केवल घोषणाएं की जा रही हैं और उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सूखे से प्रभावित किसानों के साथ खेतिहर मजदूरों को भी आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। किसानों को हर साल 12 गैस सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जाएं। पशुओं के लिए तत्काल चारा शिविर शुरू किए जाएं तथा चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। इसके बावजूद साहूकारों द्वारा कर्ज वसूली के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। सरकार की ओर से राहत नहीं मिलने के कारण किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
■ कुंभ मेले और शक्तिपीठ महामार्ग के बजट से किसानों की मदद करें
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार के खर्चों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुंभ मेले के लिए 36 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, जबकि बिना जरूरत हाथ में लिए गए शक्तिपीठ महामार्ग के लिए 80 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। सरकार के पास इन परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये हैं, लेकिन संकट में फंसे किसानों की मदद के लिए धन नहीं है। इन दोनों परियोजनाओं के लिए निर्धारित राशि का इस्तेमाल किसानों को राहत देने के लिए किया जाना चाहिए।उन्होंने पेयजल संकट पर भी चिंता जताई और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की।
सपकाल ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में पेयजल और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का आरोपहर्षवर्धन सपकाल ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कथित भ्रष्ट कामकाज के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की जा रही है। दिल्ली में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जा रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है और लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में रेल सेवाएं बंद कर दी गईं और मेट्रो सेवाएं भी रोक दी गईं। सपकाल ने सवाल उठाया कि यह अराजकता नहीं तो और क्या है? उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज को पुलिस बल के जरिए दबाना तानाशाही शासन का उदाहरण है।सपकाल ने दावा किया कि वोट चोरी का मामला उजागर होने के बाद मोदी सरकार घबरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए भाजपा मैदान में उतर आई है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा चुनाव आयोग की वकील बन गई है?एमपीएससी के विद्यार्थियों के आंदोलन का समर्थनमहाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के विद्यार्थियों के आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए सपकाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरुआत से ही विद्यार्थियों की मांगों का समर्थन कर रही है। विद्यार्थियों की मांगें उचित हैं और सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए।उन्होंने मांग की कि आयोग के अध्यक्ष का इस्तीफा लिया जाए, 70 हजार पदों पर भर्ती की जाए और एमपीएससी में कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए।
सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ दमनकारी कार्रवाई कर रही है और आंदोलनकारियों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई करके उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती। सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर भर्ती प्रक्रिया और आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
सपकाल ने दोहराया कि सूखे से जूझ रहे किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता, संपूर्ण कर्जमाफी, खेतिहर मजदूरों को राहत और विद्यार्थियों की फीस माफी जैसे कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से घोषणाओं के बजाय तत्काल ठोस कार्रवाई करने की मांग की।


