■ मुंबई के पश्चिमी उपनगरों को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत; पांच प्रमुख जंक्शन से बच सकेंगे वाहन चालक, अभिजीत बांगर ने परियोजना का किया निरीक्षण।
मुंबई वार्ता संवाददाता

पश्चिमी उपनगरों में यातायात की समस्या कम करने और सड़क परिवहन को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से जेवीपीडी (जुहू-विलेपार्ले डेवलपमेंट स्कीम) फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। इस फ्लाईओवर का निर्माण अंधेरी पश्चिम स्थित सी. डी. बर्फीवाला फ्लाईओवर के अंतिम छोर से जुहू-वर्सोवा लिंक रोड तक किया जा रहा है।


बीएमसी ने इस परियोजना को 31 दिसंबर 2027 तक पूरा कर यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे पश्चिमी उपनगरों में लगने वाले ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, यातायात प्रबंधन और निर्माण कार्य पूरा करने की समय-सीमा की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सीमा 31 मार्च 2028 से पहले, यानी 31 दिसंबर 2027 तक फ्लाईओवर को यातायात के लिए खोलने के उद्देश्य से काम में तेजी लाई जाए।


■ 1.75 किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर
जेवीपीडी फ्लाईओवर की कुल लंबाई 1,750 मीटर यानी 1.75 किलोमीटर और चौड़ाई 15.10 मीटर होगी। परियोजना को निर्धारित समय से पहले पूरा करने के लिए निर्माण कार्यों को गति देने और विभिन्न गतिविधियों को समानांतर रूप से संचालित करने पर जोर दिया गया है, ताकि नागरिकों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
■ पाइपलाइन स्थानांतरण और मेट्रो के साथ समन्वय बड़ी चुनौती
इस परियोजना के निर्माण में विभिन्न भूमिगत बुनियादी सुविधाओं को स्थानांतरित करना और मेट्रो लाइन-2बी के निर्माण कार्य के साथ समन्वय स्थापित करना प्रमुख चुनौतियां हैं।इसके तहत 600 मिलीमीटर और 900 मिलीमीटर व्यास वाली जलापूर्ति पाइपलाइनों को लगभग 400 मीटर की लंबाई में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा, 1,200 मिलीमीटर व्यास वाली सीवेज पाइपलाइन को माइक्रो टनलिंग तकनीक के माध्यम से स्थानांतरित किया जाएगा। 300 मिलीमीटर व्यास वाली सीवेज पाइपलाइन को भी स्थानांतरित कर नए सिरे से बिछाया जाएगा।मेट्रो स्टेशन के नीचे फ्लाईओवर के गर्डर स्थापित करने के लिए उन्हें क्षैतिज दिशा में खिसकाने की विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, 90 फीट जंक्शन पर 72 मीटर लंबा आर्च ब्रिज यानी मेहराब के आकार का पुल बनाया जाएगा।
जुहू सर्कल क्षेत्र में कम से कम खंभों का उपयोग करते हुए लंबी दूरी के स्पैन तैयार करना भी इस परियोजना की प्रमुख इंजीनियरिंग चुनौतियों में शामिल है।इन चुनौतियों से निपटने और निर्माण कार्य समय पर पूरा करने के लिए अभिजीत बांगर ने पूरी परियोजना को तीन चरणों में विभाजित करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग टीमें नियुक्त की जाएंगी, ताकि विभिन्न कार्य समानांतर रूप से पूरे किए जा सकें और निर्माण में अनावश्यक देरी न हो।
पांच प्रमुख जंक्शन से बच सकेंगे वाहन चालकअतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने कहा कि इस फ्लाईओवर का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी उपनगरों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और प्रमुख चौराहों पर वाहनों का दबाव कम करना है। प्रस्तावित वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और मुंबई कोस्टल रोड (उत्तर) की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए भी यह फ्लाईओवर महत्वपूर्ण साबित होगा।फ्लाईओवर के शुरू होने के बाद वाहन चालक रास्ते में पड़ने वाले पांच प्रमुख यातायात जंक्शन से बच सकेंगे। इससे खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में यात्रा अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
■ 45 मिनट का सफर 20 मिनट में पूरा होने की उम्मीद
फिलहाल इस मार्ग पर व्यस्त समय के दौरान यात्रा करने में लगभग 45 मिनट लगते हैं। फ्लाईओवर के निर्माण के बाद यह समय घटकर करीब 20 मिनट रह जाने की उम्मीद है। इससे यात्रा के समय में लगभग 25 मिनट की बचत हो सकती है।परियोजना पूरी होने पर जुहू, विलेपार्ले पश्चिम, अंधेरी पश्चिम और वर्सोवा के निवासियों तथा इन क्षेत्रों से गुजरने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही पश्चिमी उपनगरों की यातायात व्यवस्था अधिक सुचारु और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी।निरीक्षण के दौरान बीएमसी के प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुळे सहित संबंधित अभियंता, अधिकारी और परियोजना सलाहकार उपस्थित थे।


