■ सड़कों, फुटपाथों और इमारतों के परिसरों को सीमेंट-कंक्रीट मुक्त बनाने की अपील; वर्षा जल संचयन योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई सहित देश के शहरों में पानी की बढ़ती किल्लत को दूर करने के लिए भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए बारिश के पानी को नालों के जरिए समुद्र में बहने देने के बजाय जमीन के भीतर पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। मुंबई के पूर्व उप महापौर, शिवसेना गुजराती सेल के अध्यक्ष और उद्यमी बाबूभाई भवानजी ने एक बयान जारी कर जल संरक्षण के लिए कई सुझाव दिए हैं।


भवानजी ने कहा कि मुंबई में सड़कों, फुटपाथों और इमारतों के परिसरों को तेजी से सीमेंट-कंक्रीट से बनाया जा रहा है। इसके कारण बारिश का पानी जमीन के भीतर नहीं समा पाता और बहकर नालों के रास्ते समुद्र में चला जाता है। इसका असर भूजल स्तर के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए शहरों में वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
■ वर्षा जल संचयन योजना को प्रभावी बनाने की मांग
बाबूभाई भवानजी ने बताया कि जब वह मुंबई के उप महापौर थे, तब उन्होंने शहर में वर्षा जल संचयन यानी बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने की योजना शुरू की थी। हालांकि, उन्होंने अफसोस जताया कि प्रशासन की कथित निष्क्रियता के कारण यह योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकी और अब केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इमारतों के परिसरों में सीमेंट-कंक्रीट के बजाय ऐसी सतह बनाई जाए, जिससे बारिश का पानी आसानी से जमीन में समा सके। फुटपाथों पर टाइलों के बीच खाली जगह छोड़ी जाए, ताकि पानी को जमीन के भीतर पहुंचने का रास्ता मिल सके। इसी तरह मैदानों और उद्यानों के किनारों पर गहरे गड्ढे खोदकर उनमें पत्थर भरे जा सकते हैं। इससे बारिश का पानी धीरे-धीरे जमीन में उतरेगा और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
■ स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज के निर्माण में बदलाव का सुझाव
भवानजी ने स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज यानी वर्षा जल निकासी व्यवस्था के निर्माण में भी बदलाव करने की जरूरत बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी व्यवस्था तैयार करते समय जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां निचली सतह पर सीमेंट-कंक्रीट के बजाय पत्थरों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि बारिश के पानी को जमीन में समाने का अवसर मिल सके।
उनका कहना है कि इस तरह के उपायों से भूजल स्तर में सुधार हो सकता है, पर्यावरण को लाभ मिल सकता है और बारिश के पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे शहरों में पानी की कमी की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
■ गांवों से शहरों तक लागू हो जल संरक्षण की योजना
बाबूभाई भवानजी ने कहा कि जल संरक्षण की इस पहल को केवल मुंबई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे गांवों और शहरों की नदियों, छोटी-बड़ी नहरों, आवासीय सोसायटियों, औद्योगिक परिसरों, सरकारी एवं निजी जमीनों, खेल के मैदानों, उद्यानों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों की खुली जगहों पर भी लागू किया जाना चाहिए।उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने पर भी जोर दिया। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन के विषय को पढ़ाई में शामिल करने और विद्यार्थियों से संबंधित व्यावहारिक गतिविधियां करवाने का सुझाव दिया।
भवानजी के अनुसार, बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने, वृक्षारोपण बढ़ाने और जल संरक्षण के उपायों को योजनाबद्ध तरीके से लागू करके पानी की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है। इसके लिए प्रशासन, नागरिकों, आवासीय सोसायटियों और विभिन्न संस्थानों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।


