■ प्रति एकड़ कम से कम ₹25,000 की आर्थिक सहायता, संपूर्ण कर्जमाफी और बिजली बिल माफी की मांग।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में सूखे और प्राकृतिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए महायुति सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने सवाल उठाए हैं। पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातेले ने दिवाली से पहले किसानों को केवल 5,000 रुपये की अग्रिम सहायता देने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाएं किसानों की वास्तविक समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।


एडवोकेट मातेले ने कहा कि खाद, बीज, डीजल और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में खेती पर प्रति एकड़ 20,000 से 25,000 रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। ऐसे में केवल 5,000 रुपये की सहायता से किसानों की जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रभावित किसानों के बैंक खातों में प्रति एकड़ कम से कम 25,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता तत्काल जमा करे।
■ चारे की खरीद और वितरण के लिए ठोस योजना बनाने की मांग
मातेले ने सरकार की ओर से चारे की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि चारे का निर्धारित खरीद मूल्य कितना होगा और खरीद केंद्र कहां स्थापित किए जाएंगे। उनके अनुसार, सूखे के कारण कई गांवों में पशुओं के लिए पानी और चारे की समस्या गंभीर हो गई है। उन्होंने प्रत्येक तालुका में तत्काल निःशुल्क चारा शिविर और चारा वितरण केंद्र शुरू करने की मांग की।
■ प्रभावित क्षेत्रों में आधिकारिक सूखा घोषित करने की मांग
मातेले ने दावा किया कि महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है और पानी की कमी के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में आधिकारिक रूप से सूखा घोषित करने में देरी कर रही है।
उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में सूखे की स्थिति को आधिकारिक रूप से घोषित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को सरकारी राहत, रियायतों और नुकसान की भरपाई का लाभ मिल सके।
■ संपूर्ण कर्जमाफी और बिजली बिल माफी की मांग
राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश महासचिव ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक संकट में फंसे किसानों पर बैंक और निजी साहूकारों के कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। इसके बावजूद सरकार की राहत घोषणाओं में संपूर्ण कर्जमाफी और बिजली बिल माफी जैसे मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई है।
उन्होंने मांग की कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के चालू वर्ष के बिजली बिल 100 प्रतिशत माफ किए जाएं। साथ ही, बैंकों की ओर से की जाने वाली अनिवार्य कर्ज वसूली पर रोक लगाकर किसानों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी की घोषणा की जाए।
■ फसल बीमा कंपनियों पर कार्रवाई की मांग
मातेले ने फसल बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल खराब होने के बावजूद कई किसानों को बीमा कंपनियों की शर्तों और प्रक्रियाओं के कारण मुआवजा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि फसल बीमा कंपनियों को किसानों के दावों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए जाएं और एक महीने के भीतर पात्र किसानों को 100 प्रतिशत देय फसल बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने केवल 25 प्रतिशत अग्रिम राशि देने की व्यवस्था के बजाय किसानों को पूर्ण देय मुआवजा दिलाने पर जोर दिया।
एडवोकेट अमोल मातेले ने अंत में आरोप लगाया कि महायुति सरकार किसानों को राहत देने के बजाय घोषणाओं और प्रचार तक सीमित है। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने, चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सूखा घोषित करने तथा कर्ज और बिजली बिल से राहत देने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।


