मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में घर खरीदारों को राहत दिलाने के लिए महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (महारेरा) की ओर से की गई कार्रवाई में मुंबई उपनगर जिला सबसे आगे रहा है। जिले में बिल्डरों से घर खरीदारों के मुआवजे के रूप में 142.31 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। राज्यभर में महारेरा ने जिला कलेक्टर कार्यालयों की मदद से अब तक कुल 369.45 करोड़ रुपये की वसूली की है। यह राशि उन घर खरीदारों को मिलने वाले मुआवजे से संबंधित है, जिनके पक्ष में महारेरा ने आदेश जारी किए थे।


महारेरा के आंकड़ों के अनुसार, मई 2017 में प्राधिकरण की स्थापना के बाद से अब तक 1,531 शिकायतकर्ताओं के मुआवजे के लिए कुल 1,037.86 करोड़ रुपये के वसूली आदेश जारी किए गए हैं। इनमें से लगभग 45 प्रतिशत राशि वसूल की जा चुकी है। इस उपलब्धि के साथ महारेरा मुआवजा वसूली के मामले में देश के रेरा प्राधिकरणों में पहले स्थान पर है।
■ मुंबई उपनगर में सबसे ज्यादा वसूली
जिलावार आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई उपनगर में 415.93 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए थे। इनमें से 142.31 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं। मुंबई शहर दूसरे स्थान पर है, जहां 231.81 करोड़ रुपये के मुकाबले 85.80 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।पुणे जिले में 230.45 करोड़ रुपये की बकाया मुआवजा राशि में से 68.63 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं। ठाणे शहर में 87.45 करोड़ रुपये के मुकाबले 36.79 करोड़ रुपये और अलीबाग में 27.54 करोड़ रुपये के मुकाबले 12 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।इसके अलावा नागपुर में 9.65 करोड़ रुपये, पालघर और नासिक में 4.90-4.90 करोड़ रुपये तथा छत्रपति संभाजीनगर में 3.84 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई है। सिंधुदुर्ग में 54 लाख रुपये, सोलापुर में 12 लाख रुपये और चंद्रपुर में 9 लाख रुपये की वसूली के बाद इन जिलों में संबंधित मुआवजा बकाया शून्य हो गया है।
■ वसूली प्रक्रिया तेज करने के लिए सरकार का कदम
महारेरा को मुआवजा वसूली के आदेश जारी करने का अधिकार है, लेकिन इन आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग और संबंधित जिलाधिकारी कार्यालयों की होती है। रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 40(1) के तहत वसूली की कार्रवाई महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार की जाती है।वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नई कार्यप्रणाली लागू की है। इसके तहत प्रत्येक जिले में निवासी उपजिलाधिकारी और अतिरिक्त जिलाधिकारी को महारेरा के मामलों में समर्पित राजस्व वसूली अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।यदि कोई बिल्डर निर्धारित समयसीमा में घर खरीदार को मुआवजा नहीं देता है, तो महारेरा वसूली वारंट जारी कर संबंधित जिलाधिकारी कार्यालय को भेजता है। इसके बाद राजस्व विभाग बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू करता है।
■ करीब 209 करोड़ रुपये की वसूली पर कानूनी रोक
महारेरा के अनुसार, कुल वसूली आदेशों में से लगभग 104.70 करोड़ रुपये के मामले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष लंबित हैं। वहीं, 104.46 करोड़ रुपये के मामले महाराष्ट्र वित्तीय प्रतिष्ठानों में जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण संबंधी कानून (एमपीआईडी अधिनियम) के अंतर्गत आते हैं। इन दोनों श्रेणियों में कुल लगभग 209.16 करोड़ रुपये की वसूली पर फिलहाल प्रतिबंध है।
महारेरा की इस कार्रवाई से उन घर खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बिल्डरों के खिलाफ शिकायतों में मुआवजे का आदेश मिलने के बावजूद अपनी राशि प्राप्त करने के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कुल बकाया राशि की तुलना में वसूली का अनुपात यह भी दर्शाता है कि शेष मुआवजा प्राप्त करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर अभी और कार्रवाई की आवश्यकता है।


