मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन और काजोल के जुहू स्थित बंगले के कुछ हिस्सों को कथित अनधिकृत निर्माण के मामले में तोड़ दिया है। शनिवार, 17 अक्टूबर को की गई इस कार्रवाई के पीछे निर्माण कार्य के लिए आवश्यक महानगरपालिका की मंजूरी नहीं होने का मामला बताया जा रहा है। बीएमसी ने इससे पहले 10 सितंबर 2026 को निर्माण कार्य रोकने के लिए नोटिस जारी किया था।


7,802 वर्ग फुट के बंगले में बदलाव को लेकर विवादमीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बंगला मुंबई के जुहू स्थित कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में है और इसका क्षेत्रफल लगभग 7,802 वर्ग फुट है। बीएमसी के मुताबिक, बंगले में आंतरिक बदलाव, विभाजन की दीवारें बनाने, खिड़कियों में परिवर्तन करने और अन्य निर्माण संबंधी कार्य किए जा रहे थे। इन कार्यों के लिए आवश्यक महानगरपालिका की अनुमति नहीं ली गई थी।


बीएमसी ने मुंबई महानगरपालिका अधिनियम की धारा 354ए के तहत 10 सितंबर को नोटिस जारी कर काम तत्काल रोकने और संबंधित अनुमति तथा दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
अधिकारियों के अनुसार, नोटिस के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने पर महानगरपालिका ने संबंधित हिस्सों को तोड़ने की कार्रवाई की।सैलून और स्पा खोलने की योजना को लेकर भी विवादइस मामले में बंगले के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर भी विवाद सामने आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अजय देवगन के परिवार ने इस संपत्ति को फ्लोरियन हुरेल सैलून्स प्राइवेट लिमिटेड को पांच साल के लिए पट्टे पर दिया था। यहां सैलून और स्पा शुरू करने की योजना थी।कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के कुछ निवासियों ने संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी।
उनका कहना था कि इससे सोसायटी की आंतरिक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बढ़ने के साथ पार्किंग, शोर और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।सोसायटी की ओर से इस मामले में बीएमसी से शिकायत भी की गई थी। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि संपत्ति को किराये पर देने की अनुमति और वहां व्यावसायिक गतिविधियां चलाने अथवा निर्माण में बदलाव करने की अनुमति अलग-अलग विषय हैं।
■ बीएमसी की कार्रवाई के बाद मामला चर्चा में
बीएमसी की कार्रवाई बंगले के कथित अनधिकृत निर्माण से संबंधित है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में अजय देवगन की टीम की ओर से इस ताजा कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने की बात कही गई है। हालांकि, निर्माण संबंधी अनुमतियों को लेकर पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है।


