मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई और आसपास के इलाकों में अक्टूबर महीने में भीषण गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण लू लगने और गर्मी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर खुले में काम करने वाले मजदूरों, निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों और अन्य मेहनतकश लोगों पर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में दोपहर के समय निर्माण परियोजनाओं का काम बंद रखने की मांग उठी है।


मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में मुंबई के उपनगरों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया। 13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सांताक्रूज में अधिकतम तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.1 डिग्री अधिक था। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
■ दोपहर की तेज धूप में काम करने वाले श्रमिक सबसे अधिक जोखिम में
निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों को लंबे समय तक धूप और गर्म वातावरण में रहना पड़ता है। पर्याप्त पानी, छाया और आराम की सुविधा नहीं मिलने पर शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, सिरदर्द और लू लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ता तापमान और मुंबई की उमस शरीर पर गर्मी का असर और गंभीर बना सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2026 में बाहरी क्षेत्रों में काम करने वाले असंगठित श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की थी। इसके तहत गर्मी के ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनिवार्य विश्राम तथा काम का समय सुबह 6 से 11 बजे और शाम 4 से 8 बजे के बीच रखने के निर्देश दिए गए थे। इन दिशा-निर्देशों में निर्माण मजदूरों, सफाई कर्मचारियों और सड़क किनारे काम करने वाले श्रमिकों को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
■ श्रमिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
गर्मी के बढ़ते खतरे को देखते हुए निर्माण स्थलों पर पीने के पानी, छायादार विश्राम स्थलों और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है। साथ ही, श्रमिकों को नियमित अंतराल पर आराम देने और अत्यधिक गर्मी के समय खुले में शारीरिक श्रम से बचाने की जरूरत है।नोट: आपके दिए गए मराठी समाचार के शीर्षक में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक परियोजनाओं का काम बंद रखने की मांग का उल्लेख है।
हालांकि, उपलब्ध अन्य रिपोर्टों से इस विशेष मांग को उठाने वाले व्यक्ति या संगठन और उसकी आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे लागू सरकारी आदेश के बजाय मांग के रूप में ही समझा जाना चाहिए।


