मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में संभावित जल संकट से निपटने और पानी के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर के पारंपरिक कुओं के पुनरुद्धार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े ने प्रत्येक वार्ड के लिए 30 लाख रुपये का प्रारंभिक निधि मंजूर किया है। इस राशि से कुओं की सफाई, उनमें जमा गाद और कचरा निकालने तथा आवश्यक मरम्मत के काम किए जाएंगे।


एल-नीनो के संभावित प्रभाव और आगामी मानसून में कम बारिश की आशंका को देखते हुए महानगरपालिका वैकल्पिक जल स्रोत तैयार करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य पानी की उपलब्धता बढ़ाना और गैर-पीने के कार्यों के लिए उपचारित पेयजल पर निर्भरता कम करना है।


■ प्रत्येक वार्ड में पांच कुओं का होगा चयन
इस योजना के तहत प्रत्येक वार्ड में आवश्यकता के अनुसार पांच खुले कुओं का चयन किया जाएगा। चयनित कुओं से गाद और कचरा निकालकर उनकी सफाई की जाएगी। जरूरत के मुताबिक कुओं की मरम्मत कर उन्हें दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाएगा।इसके साथ ही कुओं से पानी निकालने के लिए दो हॉर्सपावर के पंप लगाए जाएंगे और प्रत्येक चयनित कुएं के पास पांच हजार लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इन कुओं से उपलब्ध पानी को टैंकरों के माध्यम से भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जा सकेगा।
■ गैर-पीने के कामों में होगा कुओं के पानी का इस्तेमाल
महानगरपालिका का उद्देश्य कुओं के पानी का इस्तेमाल उन कार्यों में करना है, जिनके लिए फिलहाल उपचारित पेयजल का उपयोग किया जाता है। इनमें सड़क की सफाई, बागवानी, निर्माण कार्य और शौचालयों में पानी का इस्तेमाल जैसे कार्य शामिल हैं।इससे पीने योग्य पानी की बचत होने के साथ ही मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। चॉलों, झोपड़पट्टियों, ऊंचाई वाले इलाकों और बड़ी आवासीय सोसायटियों के आसपास जरूरत के अनुसार कुओं को पुनर्जीवित करने की योजना है।
■ अप्रैल में दिए गए थे निर्देश, अब शुरू होगी कार्रवाई
मुंबई में कुओं के पुनरुद्धार का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। महापौर रितू तावड़े ने अप्रैल 2026 में अधिकारियों को शहर के कुओं की स्थिति और उनकी उपयोगिता का आकलन कर उन्हें दोबारा चालू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 11 जून को महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े ने जल अभियंता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर कुओं की सफाई, गाद निकालने और वर्षा जल पुनर्भरण की व्यवस्था करने पर जोर दिया था।हालांकि, इन निर्देशों के बावजूद योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई। अब निधि मंजूर होने के बाद जल अभियंता विभाग ने संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
■ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निधि भी मिलेगी
महानगरपालिका ने प्रत्येक वार्ड के लिए 30 लाख रुपये की प्रारंभिक निधि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यदि कुओं की सफाई, मरम्मत और आवश्यक उपकरण लगाने में यह राशि अपर्याप्त साबित होती है, तो नियमानुसार अतिरिक्त आयुक्त या महानगरपालिका आयुक्त की मंजूरी से अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराई जा सकती है।
मुंबई में बढ़ती पानी की मांग और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने कुओं को दोबारा उपयोग में लाया जाता है और उनसे कितना अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो पाता है।


