मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में सोमवार को मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाओं में आई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से प्रभावित रेल सेवाओं के चलते कई यात्रियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग और मेट्रो का सहारा लिया। नियमित लोकल ट्रेनों में देरी होने से यात्रियों को अपने रोजमर्रा के सफर की योजना बदलनी पड़ी।
मुंबई के व्यस्त मध्य रेलवे मार्ग पर दो अलग-अलग तकनीकी घटनाओं ने रेल परिचालन को प्रभावित किया। कांजुरमार्ग स्टेशन के सिग्नल तंत्र में खराबी आई, जबकि मुलुंड और ठाणे के बीच रेल की ऊपरी बिजली आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी तार की समस्या सामने आई। इन घटनाओं के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई यात्रियों को सामान्य से काफी अधिक समय तक सफर करना पड़ा।


■ कांजुरमार्ग में सिग्नल प्रणाली ठप, 80 लोकल सेवाएं रद्द
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कांजुरमार्ग स्टेशन के सिग्नल कक्ष में सुबह लगभग 9:33 बजे आग लगने के बाद छह रेल लाइनों पर करीब 24 सिग्नल बंद हो गए। इससे विक्रोली और भांडुप के बीच ट्रेनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। दूसरी ओर, सुबह लगभग 9:23 बजे मुलुंड और ठाणे के बीच रेल की ऊपरी बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर एक बाहरी तार लटकता मिला। इसे हटाने के लिए बिजली आपूर्ति रोककर मरम्मत की गई और संबंधित लाइन सुबह लगभग 10:48 बजे बहाल हुई।इस दोहरी तकनीकी गड़बड़ी का असर मध्य रेलवे की मुख्य लाइन के साथ हार्बर लाइन पर भी पड़ा। कुल 80 लोकल सेवाएं रद्द की गईं, जिनमें 60 मुख्य लाइन और 20 हार्बर लाइन की सेवाएं थीं। लंबी दूरी की ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान पर भी देरी का असर पड़ा।


■ यात्रियों ने बदले रास्ते, मेट्रो और बसों से पहुंचे गंतव्य तक
रेल सेवाओं में देरी के कारण यात्रियों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाए। ठाणे से दक्षिण मुंबई जाने में लगभग एक घंटे या उससे अधिक समय लगने पर कुछ यात्रियों ने ट्रांस-हार्बर लाइन, ऑटो रिक्शा और दूसरी लोकल ट्रेनों का सहारा लिया। घाटकोपर के एक यात्री ने ऑटो से तिलक नगर पहुंचकर हार्बर लाइन की ट्रेन पकड़ी, जबकि भांडुप से एक अन्य यात्री ऑटो रिक्शा और मेट्रो की लाइन 1 तथा लाइन 3 का इस्तेमाल कर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पहुंचा। कुछ यात्रियों ने मेट्रो और बसों को मिलाकर भी सफर पूरा किया।कई यात्रियों को चलती सेवा रुकने के कारण ट्रेनों में 70 से 90 मिनट तक फंसे रहना पड़ा। कुछ यात्री नजदीकी स्टेशन पहुंचने के लिए पटरियों पर पैदल चलते दिखाई दिए। तेज गर्मी में पैदल चलने से यात्रियों को थकान और पानी की कमी जैसी परेशानियां भी हुईं। लंबे इंतजार के कारण कुछ लोगों ने अपनी यात्रा रद्द कर वापस लौटने का फैसला किया।
■ शाम तक चरणबद्ध तरीके से बहाल हुई सिग्नल व्यवस्था
रेलवे की ओर से सिग्नल प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, डाउन थ्रू लाइन के ट्रैक सर्किट शाम 4:10 बजे और अप थ्रू लाइन के शाम 4:45 बजे चालू हुए। डाउन लोकल लाइन का सिग्नल शाम 5:30 बजे और अप स्लो लाइन का सिग्नल शाम 6:18 बजे बहाल किया गया।कांजुरमार्ग के सिग्नल कक्ष में आग लगने के कारणों की जांच के लिए वरिष्ठ स्तर की जांच के आदेश दिए गए हैं। लगातार दो तकनीकी घटनाओं के कारण यात्रियों को पूरे दिन परेशानी झेलनी पड़ी और मुंबई की व्यस्त उपनगरीय रेल व्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिला।


