■ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने विपक्ष पर लगाए विकास परियोजनाओं के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप; दावा- परियोजना से 3,000 लोगों को मिलेगा रोजगार, काटे जाने वाले पेड़ों से दोगुने पेड़ लगाए जाएंगे।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में विकास परियोजनाओं के विरोध को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने आरोप लगाया कि राज्य में जब भी कोई विकास परियोजना शुरू होती है, तो उसे पर्यावरण विरोधी बताकर भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जाता है।


उन्होंने टॉरंट पावर परियोजना के विरोध को इसका उदाहरण बताते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता और पर्यावरण के नाम पर आंदोलन करने वाले समूह महाराष्ट्र के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।उपाध्ये सोमवार को मुंबई स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पंकज मोदी भी उपस्थित थे।
उपाध्ये ने कहा कि महाराष्ट्र और विशेषकर मुंबई को कुछ वर्ष पहले विकास विरोधी राजनीति के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में पर्यावरण के मुद्दे पर मुंबई मेट्रो का काम रोक दिया गया था। उनके अनुसार, इस निर्णय के कारण महाराष्ट्र को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि मेट्रो परियोजना का काम रोकना एक बड़ी गलती थी।
उपाध्ये के मुताबिक, उस समय भी पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाकर पर्यावरण के नाम पर परियोजना का विरोध किया गया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अदालत में काटे जाने वाले पेड़ों की तुलना में दस गुना अधिक पेड़ लगाने की बात कही थी और पौधारोपण की प्रक्रिया उच्च न्यायालय की निगरानी में हुई थी।भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि टॉरंट पावर परियोजना के विरोध में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने विरोध करने वाले राजनीतिक नेताओं और समूहों की आलोचना करते हुए उनके गठजोड़ को अनुचित बताया।
■ परियोजना की अनुमति को लेकर लगाए गए आरोपों पर जवाब
टॉरंट पावर परियोजना को लेकर यह आरोप लगाए जाने पर कि बिना अनुमति अचानक रातोंरात काम शुरू कर दिया गया, उपाध्ये ने कहा कि हजारों करोड़ रुपये की परियोजना अचानक तैयार नहीं होती। ऐसी परियोजनाओं के लिए विभिन्न समितियों और आयोगों के समक्ष निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं तथा आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करनी होती हैं।उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी और सभी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने में लगभग 18 महीने लगे। उनके अनुसार, इसके बाद ही पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इसलिए परियोजना का काम अचानक और बिना किसी प्रक्रिया के शुरू किए जाने का आरोप सही नहीं है।
■ वन्यजीवों पर असर के आरोपों को भी नकारा
परियोजना से वन्यजीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंकाओं पर भी उपाध्ये ने अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि यह परियोजना वन क्षेत्र के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में नहीं आती है।भाजपा नेता के अनुसार, परियोजना के लिए लगभग 233 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है। उन्होंने इसे सह्याद्रि क्षेत्र का एक छोटा हिस्सा बताते हुए कहा कि इसके आधार पर अन्य क्षेत्रों में वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने का दावा उचित नहीं है।हालांकि, परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव और वन्यजीवों पर इसके संभावित असर को लेकर उपाध्ये के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
■ काटे जाने वाले पेड़ों से दोगुने पेड़ लगाने का दावा
उपाध्ये ने कहा कि टॉरंट पावर परियोजना के लिए जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनकी संख्या से दोगुने पेड़ लगाए जाएंगे। उन्होंने इसे पर्यावरण संबंधी चिंताओं के समाधान की दिशा में उठाया जाने वाला कदम बताया।उन्होंने परियोजना के आर्थिक और रोजगार संबंधी लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, परियोजना से लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।उपाध्ये ने विपक्ष से सवाल किया कि क्या वह नहीं चाहता कि महाराष्ट्र के युवाओं को रोजगार मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं का विरोध करके विपक्ष राज्य की प्रगति और युवाओं के रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर रहा है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने दोहराया कि महाराष्ट्र में विकास परियोजनाओं का विरोध करने से पहले उनके संबंध में तथ्यों और निर्धारित प्रक्रियाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक विरोध के लिए पर्यावरण के मुद्दे का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि टॉरंट पावर परियोजना को लेकर फैलाई जा रही कथित भ्रामक जानकारी से राज्य और जनता का नुकसान हो सकता है।


