■ अनिल गलगली की शिकायत पर एमएसआरडीसी का आश्वासन; परियोजना को 1,421 दिनों की समयावृद्धि

वर्सोवा–बांद्रा सी लिंक परियोजना का काम 17 मई 2028 तक पूरा करने का आश्वासन महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) ने दिया है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने परियोजना में देरी, ठेकेदार की जिम्मेदारी और लिक्विडेटेड डैमेजेस (Liquidated Damages – LD) लगाने के संबंध में शिकायत और निवेदन प्रस्तुत किया था। इसके जवाब में महामंडल ने परियोजना की संशोधित पूर्णता तिथि के साथ देरी के कारणों को स्पष्ट किया है।


अनिल गलगली ने 10 फरवरी 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दाखिल कर परियोजना में देरी के कारणों, इसके लिए जिम्मेदार पक्षों की पहचान और ठेकेदार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी थी। इसके बाद 25 अगस्त 2026 को उन्होंने इस संबंध में दोबारा निवेदन प्रस्तुत किया। इस निवेदन के संदर्भ में एमएसआरडीसी ने लिखित स्पष्टीकरण दिया है।1,421 दिनों की समयावृद्धिएमएसआरडीसी के पत्र के अनुसार, परियोजना के मूल अनुबंध के तहत काम पूरा करने की तारीख 21 जून 2024 थी।
हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान विभिन्न कारणों से 1,421 दिनों की समयावृद्धि मंजूर की गई है। अब परियोजना पूरी करने की संशोधित तारीख 17 मई 2028 निर्धारित की गई है।
देरी के चार प्रमुख कारणमहामंडल ने परियोजना में देरी के लिए निम्नलिखित कारणों का उल्लेख किया है।
● कास्टिंग यार्ड के लिए जगह उपलब्ध होने में देरी : 250 दिन।
● कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन : 180 दिन।
● जॉइंट वेंचर का पुनर्गठन और कानूनी बदलाव : 483 दिन।
● काम के दायरे में बदलाव : 508 दिन।
इसमें स्थानीय कोली समुदाय की मांगों के अनुसार नेविगेशन स्पैन और रूपरेखा में बदलाव, मालाड स्थित कास्टिंग यार्ड का स्थानांतरण तथा अतिरिक्त संपर्क सड़कों का निर्माण शामिल है।
एमएसआरडीसी ने स्पष्ट किया है कि इन कारणों पर विचार करने के बाद तकनीकी समिति और सलाहकारों की जांच के उपरांत समयावृद्धि मंजूर की गई।ठेकेदार पर फिलहाल जुर्माना नहीं लगाया जा सकतापरियोजना का ठेका मे. बी. वर्ल्ड अपको जेवी के पास है।
महामंडल ने अपने जवाब में कहा है कि मंजूर समयावृद्धि को देखते हुए वर्तमान परिस्थितियों में ठेकेदार पर लिक्विडेटेड डैमेजेस (LD) लगाना या उसकी वसूली करना अनुबंध के अनुसार लागू नहीं होता।हालांकि, भविष्य में ठेकेदार की लापरवाही या उसके नियंत्रण में आने वाले कारणों से परियोजना के काम में देरी होती है, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए LD की वसूली की जाएगी।
एमएसआरडीसी ने यह भी स्पष्ट किया है।परियोजना की लागत में भी वृद्धिकाम के दायरे में बदलाव, जीएसटी दर में वृद्धि और अतिरिक्त संपर्क सड़कों के कारण परियोजना की संशोधित लागत बढ़ने की जानकारी महामंडल ने दी है। पत्र के अनुसार, परियोजना की संशोधित लागत लगभग ₹18,120.16 करोड़ हो गई है। इस संबंध में जानकारी सार्वजनिक निर्माण विभाग के 25 जुलाई 2024 के शासन निर्णय के आधार पर सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध होने की बात भी पत्र में कही गई है।
■ अनिल गलगली की मांग :
परियोजना समय पर पूरी करेंवर्सोवा–बांद्रा सी लिंक मुंबई की यातायात व्यवस्था की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। इसलिए परियोजना में देरी के कारणों को स्पष्ट करना, बढ़ी हुई लागत के संबंध में पारदर्शिता बनाए रखना और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
अनिल गलगली की शिकायत के बाद एमएसआरडीसी द्वारा दिए गए जवाब से परियोजना की संशोधित पूर्णता तिथि 17 मई 2028 स्पष्ट हुई है। अब निर्धारित समयसीमा में परियोजना पूरी करने की जिम्मेदारी महामंडल पर है। सार्वजनिक धन का उचित उपयोग सुनिश्चित करना और काम की प्रगति पर प्रभावी निगरानी रखना भी महत्वपूर्ण होगा।


