मुंबई वार्ता संवाददाता

पालघर जिले का वाढवण बंदरगाह महाराष्ट्र के हित में नहीं है। यह परियोजना स्थानीय लोगों, किसानों और मछुआरों के अस्तित्व पर सीधा हमला है। दिल्ली के ‘रंगा-बिल्ला’ को पालघर का विकास नहीं, बल्कि अडानी का विकास करना है और इसी उद्देश्य से यह परियोजना लाई गई है। महाराष्ट्र के अस्तित्व पर हमला करने वाली और स्थानीय लोगों के घर-संसार उजाड़ने वाली विनाशकारी वाढवण बंदरगाह परियोजना रद्द होने तक स्थानीय लोगों द्वारा शुरू किया गया यह संघर्ष नहीं रुकेगा। इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ आपके साथ खड़ी है। यह प्रतिपादन महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


पालघर जिले के वरोर-वाढवण में आयोजित ‘उलगुलान वाढवण बंदरगाह विरोधी जनआक्रोश सभा’ को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बोल रहे थे। इस अवसर पर शिवसेना विधायक अंबादास दानवे, पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर, पूर्व विधायक कपिल पाटील, दीपक पवार, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सत्यम ठाकुर, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बृजकिशोर दत्त, मनीष गणोरे, धनंजय शिंदे सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे।


कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि देशभर में चल रहे विभिन्न आंदोलनों को एक मंच पर लाने के लिए राहुल गांधी ने पहल की है। उनकी इस मुहिम के तहत अब तक 36 हजार आंदोलनों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 3.5 हजार आंदोलन महाराष्ट्र में चल रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जमीन और पर्यावरण जैसे विभिन्न मुद्दों पर ये आंदोलन हो रहे हैं। आंदोलन भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उनका दुश्मन एक ही है।वाढवण की लड़ाई जीती तो यह सभी आंदोलनों की जीत होगी। लेकिन जब तक दिल्ली में बैठा 56 इंच का ‘छोटा बंदरगाह’ नहीं हटेगा, तब तक यह बंदरगाह भी नहीं हटेगा।
महाराष्ट्र और वाढवण को बचाने के लिए यह संघर्ष जारी है।‘फूट डालो और राज करो’ की ब्रिटिश नीति पर चलते हुए भाजपा सरकार भी इस आंदोलन में फूट डालने का प्रयास कर रही है। इसलिए सभी लोग एकजुट रहें और सरकार के दबाव में न आएं, ऐसा आह्वान भी हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


