मुंबई वार्ता संवाददाता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 4 नवंबर को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस वापस ले लिया। साथ ही आयुक्त और उनके निजी कर्मचारियों के मासिक वेतन के भुगतान पर लगाई गई रोक भी हटा दी।


बीएमसी प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठा लिए हैं। इसके बाद अदालत ने अपने 3 नवंबर 2026 के आदेश के शुरुआती तीन पैराग्राफ वापस ले लिए।मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर. पी. भाट ने अदालत को बताया कि महानगरपालिका प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 के आदेशों का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं।
उन्होंने दलील दी कि अदालत की अवमानना से जुड़ी स्थिति को दूर करने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की है। इसके आधार पर उन्होंने अदालत से 3 नवंबर के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया।बीएमसी की दलीलों पर विचार करने के बाद तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 3 नवंबर के आदेश के पैराग्राफ 1 से 3 को वापस लेने का फैसला किया। इसके साथ ही आयुक्त अश्विनी भिड़े के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस और उनके तथा उनके निजी कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर लगाई गई रोक समाप्त हो गई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर वह अपने पूर्व निर्देशों के अनुपालन की सीमा या वास्तविक स्थिति को लेकर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है।आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। हलफनामे में उन्हें विस्तार से बताना होगा कि अदालत के पूर्व निर्देशों का पालन करने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 3 नवंबर के आदेश के पैराग्राफ 5 और 6 प्रभावी बने रहेंगे। यानी आदेश के इन हिस्सों में दिए गए निर्देशों पर फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अगले ही दिन बीएमसी ने बोरीवली में हटाए 27 व्यावसायिक ढांचेइस पूरे मामले के बीच बीएमसी ने बुधवार को मुंबई के बोरीवली पूर्व में बस अड्डे के लिए आरक्षित भूखंड पर बने 27 व्यावसायिक ढांचों को हटा दिया।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक दिन पहले बीएमसी आयुक्त के वेतन पर रोक लगाने के आदेश के बाद हुई।बीएमसी की ओर से जारी बयान के अनुसार, पश्चिमी उपनगर बोरीवली पूर्व में स्वामी विवेकानंद मार्ग स्थित आरक्षित भूखंड से अतिक्रमण हटाया गया। इस जमीन का इस्तेमाल बस अड्डे के लिए किया जाना प्रस्तावित है।इस कार्रवाई के जरिए महानगरपालिका ने भूखंड पर मौजूद 27 व्यावसायिक ढांचों को हटाकर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।
सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के फैसले से बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को फिलहाल कारण बताओ नोटिस और वेतन संबंधी प्रतिबंधों से राहत मिल गई है। हालांकि, अदालत ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व आदेशों के अनुपालन की समीक्षा अभी बाकी है।


