■ संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, आर्किटेक्ट ने परियोजना से खुद को अलग किया; ए वार्ड अधिकारी ने पुलिस सुरक्षा मिलने और अगले दिन तक तोड़फोड़ पूरी करने का किया दावा।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के ऐतिहासिक फोर्ट इलाके में स्थित 120, बोरा बाजार स्ट्रीट की एक इमारत में कथित अवैध निर्माण का मामला गंभीर होता जा रहा है। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के मुंबई बिल्डिंग रिपेयर्स एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक पत्राचार और निर्माण स्थल की तस्वीरों ने म्हाडा तथा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही इमारत में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।


मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत म्हाडा के जोन-1 के उपमुख्य अभियंता ने संबंधित इमारत की मरम्मत के लिए जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) रद्द कर दिया है। संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि एनओसी रद्द किए जाने की जानकारी इमारत के निवासियों, एनओसी धारकों और आर्किटेक्ट को दी जाए। इसके अलावा, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इमारत को पर्याप्त अस्थायी संरचनात्मक सहारा (प्रॉपिंग) देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।हालांकि, एनओसी रद्द होने के बावजूद निर्माण कार्य कथित तौर पर जारी रहने की बात सामने आने के बाद बीएमसी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।


विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब एसपी कंसल्टेंट्स के आर्किटेक्ट जगदीश सातार ने 10 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर परियोजना से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह उक्त इमारत से संबंधित परियोजना के लिए जिम्मेदार नहीं रहेंगे।
म्हाडा के पत्राचार में कथित अनधिकृत निर्माण का उल्लेख होने के बीच आर्किटेक्ट का परियोजना से अलग होना मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर निर्माण स्थल पर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनके चलते आर्किटेक्ट को परियोजना से हटना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, म्हाडा के जोन-1 कार्यालय की ओर से जारी पत्रों में इमारत परिसर में कथित अनधिकृत निर्माण का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। साथ ही महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम (एमआरटीपी एक्ट) के तहत उचित कार्रवाई करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।इन दस्तावेजों में बीएमसी से आवश्यक निर्माण अनुमतियां प्राप्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें विशेष रूप से अस्वीकृति की सूचना (आईओडी) और निर्माण शुरू करने का प्रमाणपत्र (सीसी) शामिल हैं।
सवाल यह है कि क्या संबंधित निर्माण कार्य के लिए ये जरूरी अनुमतियां ली गई थीं?इस मामले में 4 अगस्त 2026 को खींची गई तस्वीरों में निर्माण स्थल पर खुदाई, लोहे की सरियों और अन्य निर्माण गतिविधियों को देखा जा सकता है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद इमारत की संरचनात्मक मजबूती और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंताएं और गहरा गई हैं।जब म्हाडा के आधिकारिक पत्राचार में ही कथित अनधिकृत निर्माण का उल्लेख किया गया है, तो सवाल उठता है कि बीएमसी ने अब तक क्या ठोस कार्रवाई की है? यदि निर्माण नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो मौके पर चल रहे काम को रोकने के लिए महानगरपालिका ने कौन-से कदम उठाए हैं?फोर्ट जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह की कथित निर्माण गतिविधियों की अनदेखी गंभीर परिणामों को जन्म दे सकती है।
स्थानीय निवासियों ने भी आशंका जताई है कि किसी प्रकार की लापरवाही से इमारत में रहने वाले लोगों, निर्माण मजदूरों और आसपास की संपत्तियों में रहने वाले नागरिकों की जान खतरे में पड़ सकती है।इसके अलावा, मरम्मत के लिए जारी एनओसी रद्द करना और इमारत को अस्थायी संरचनात्मक सहारा देने के निर्देश जारी करना अपने आप में मामले की गंभीरता को दर्शाता है। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि यदि संबंधित अधिकारियों की कथित लापरवाही या निष्क्रियता के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
इस मामले में जब संवाददाता ने बीएमसी के ए वार्ड अधिकारी लोमटे से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि पुलिस सुरक्षा प्राप्त कर ली गई है और अगले दिन तक तोड़फोड़ की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि म्हाडा की ओर से हस्तक्षेप किए जाने और मरम्मत का एनओसी रद्द किए जाने के बावजूद क्या बीएमसी वास्तव में सभी अनधिकृत निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाएगी? क्या महानगरपालिका समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर इमारत में रहने वाले लोगों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी? या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?


