■ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े पर हुई कार्रवाई के बाद प्रशासन में हलचल; स्थायी समिति में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की उठी थी मांग।
मुंबई वार्ता संवाददाता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने में देरी के कारण मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिड़े के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब इसका असर महापालिका प्रशासन में दिखाई देने लगा है। इस मामले में बीएमसी की छवि खराब होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग स्थायी समिति की बैठक में उठाई गई थी। इसके बाद प्रशासन ने आर-मध्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल्ल तांबे और कानून विभाग की अधिकारी कोमल पंजाबी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


दरअसल, बोरिवली में बेस्ट बस डिपो के लिए आरक्षित भूखंड पर हुए अनधिकृत निर्माणों को हटाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने कई बार दिया था। इसके बावजूद इन आदेशों का निर्धारित समय पर पालन नहीं किया गया। इस मामले में 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए आयुक्त अश्विनी भिड़े को अवमानना का नोटिस जारी किया था। साथ ही महापालिका पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और आयुक्त तथा उनके निजी कर्मचारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया था।


इस घटनाक्रम के बाद बुधवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में सदस्यों ने महापालिका प्रशासन के कामकाज पर नाराजगी जताई। सदस्यों का कहना था कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण आयुक्त और महापालिका को अदालत की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इसलिए इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस बीच, बोरिवली में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नाराज पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी गुरुवार को पूरे दिन बीएमसी मुख्यालय में डटे रहे। उनके साथ स्थानीय विधायक संजय उपाध्याय और स्थानीय नगरसेविका भी मौजूद थीं। शेट्टी ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक मुख्यालय नहीं छोड़ने का रुख अपनाया। उनका कहना था कि महापालिका की ओर से की गई कार्रवाई गलत है, क्योंकि इस भूखंड पर पिछले 40 वर्षों से लोग रह रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के पुनर्वास की जिम्मेदारी कौन लेगा?
बोरिवली अतिक्रमण मामले को लेकर बुधवार से ही बीएमसी में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी था। स्थायी समिति की बैठक में भी इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा हुई। गुरुवार को भी बैठकों का सिलसिला जारी रहा। मामला गंभीर होने के कारण सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि प्रशासन किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करता है। आखिरकार आर-मध्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल्ल तांबे और कानून विभाग की अधिकारी कोमल पंजाबी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर ने भी इस मामले की पृष्ठभूमि में बीएमसी आयुक्त से कानून विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने कानून विभाग के अधिकारियों के कानूनी ज्ञान, न्यायालयीन मामलों की पैरवी, सुनवाई से पहले की तैयारी और वकीलों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारियों की समीक्षा करने की मांग की है।
दौंडकर ने यह भी सुझाव दिया है कि न्यायालयीन मामलों को संभालने वाले अधिकारियों के बार-बार तबादलों और कामकाज में निरंतरता की कमी के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं की जांच की जाए। इसके साथ ही अदालत के आदेशों के पालन में लापरवाही के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग भी की है।


