मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर एडवोकेट अमोल मातेले ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री को सीधे ई-मेल भेजकर जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि AICTE और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण राज्य के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है।


मातेले ने कहा कि गरीब और सामान्य परिवारों के विद्यार्थी लाखों रुपये खर्च कर, कर्ज लेकर तथा दिन-रात मेहनत करके शिक्षा हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में मान्यता, प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक लापरवाही उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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■ AICTE सालभर क्या घास खोद रहा था?’
AICTE द्वारा हाल ही में बिना मान्यता अथवा नियमों के विपरीत संचालित संस्थानों की सूची जारी किए जाने पर मातेले ने सवाल उठाया। उनके अनुसार, सूची में मुंबई और ठाणे क्षेत्र की 15 समेत महाराष्ट्र की कुल 18 संस्थाएं शामिल हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब इन संस्थानों के पास आवश्यक मान्यता और बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं, तो विद्यार्थियों के प्रवेश लेने के बाद ही कार्रवाई क्यों की गई? उन्होंने कहा कि AICTE और शिक्षा विभाग को पूरे वर्ष संस्थानों की निगरानी और जांच करनी चाहिए थी।
मातेले ने मांग की कि समय पर संस्थानों की जांच नहीं करने वाले संबंधित अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
■ लॉ और बीएड प्रवेश प्रक्रिया पर भी सवाल
मातेले ने लॉ और बीएड पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया में कथित देरी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी और नियमों से जुड़े कारणों के चलते कॉलेजों पर ऐन वक्त पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि प्रवेश प्रक्रिया लंबे समय से प्रभावित है।
उनका कहना है कि इससे कानून, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने का खतरा है।
पेपर लीक को बताया ईमानदार विद्यार्थियों के साथ अन्याय
राज्य में विभिन्न परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भी मातेले ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिन-रात पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की मेहनत पर पेपर लीक करने वाले गिरोह पानी फेर रहे हैं।
उन्होंने पेपर लीक मामलों के मुख्य सूत्रधारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और उन्हें जेल भेजने की मांग की।
■ मातेले की प्रमुख मांगें
AICTE और तकनीकी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए।
बिना मान्यता वाले संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वैकल्पिक प्रवेश दिया जाए।
लॉ और बीएड की लंबित प्रवेश प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।
पेपर लीक मामलों के मुख्य आरोपियों और सूत्रधारों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
विद्यार्थियों को होने वाले शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए।
मातेले ने कहा कि शिक्षा मंत्री विद्यार्थियों के अभिभावक की भूमिका में होते हैं। यदि उनके द्वारा भेजे गए ई-मेल पर सरकार ने तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का घेराव किया जाएगा और सरकार के खिलाफ तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।


