मुंबई वार्ता संवाददाता

“अजितदादा पवार, जो कहते हैं कि, मैं अपनी बात कापक्का हूँ”, आज एक बार फिर अपनी सार्थकता सिद्ध कर रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र को अब इसका एहसास हो गया है। अजीत की बातें ‘पक्की’ हैं, लेकिन वे बातें आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ ‘घर पर’ बैठे लोगों के लिए हैं। यह बातेँ अमोल मातेले (मुंबई अध्यक्ष, राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस शरद चंद्र पवार) ने कही है।
उन्होंने कहा कि,” चुनाव खत्म हो गए और बहनों को 2,100 रुपये नहीं मिले। दादा के शब्द कोई निश्चित शब्द नहीं है, बल्कि एक निश्चित भ्रांति है। जो लोग सोचते हैं कि सत्ता एक महान संपत्ति है, वे कभी भी लोकतंत्र का मूल्य नहीं जान पाएंगे। अजित दादा, यह मत भूलिए कि महाराष्ट्र को आज ऐसे नेताओं की जरूरत है जो ‘सच बोलें’ न कि’कांटे बोने वाले।”
अमोल मातेले ने कहा कि, “शब्द चाहे कितने भी सशक्त क्यों न हों, यदि उनके पीछे नैतिकता, न्याय और आम लोगों के प्रति सोच नहीं है, तो वे शब्द नहीं, बल्कि सत्ता द्वारा फेंका गया जाल मात्र हैं। महाराष्ट्र ‘वंशवादी शासन के कड़े शब्दों’ पर नहीं, बल्कि सच्चे विकास की उम्मीद पर आगे बढ़ रहा है।”


