■ 2022 से अब तक ई‑कॉमर्स साइटों 17,500 से अधिक शिकायतें हुई दर्ज.
मुंबई वार्ता संवाददाता

कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया ई-कॉमर्स साइटों द्वारा सस्ते के नाम पर धड़ल्ले से नकली और मिलावटी सामान बेचा जा रहा है। इस संदर्भ में हमने कई बार सरकार के अलग-अलग विभागों में शिकायतें की है लेकिन कार्यवाही न होने से इन ई कॉमर्स साइटों का नकली एवं मिलावटी सामान बेचने का आत्मविश्वास और भी बढ़ गया है। अब ये मामला संसद तक पहुंच चुका है।


संसद में उठे प्रश्न के जवाब में उपभोक्ता मामले विभाग ने संसद को सूचित किया कि 2022 से अब तक ई‑कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नकली, डुप्लीकेट और मिलावटी सामान से संबंधित 17,500 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसमें सबसे अधिक — 7,221 मामले — वर्ष 2025 की पहली छमाही (जनवरी–जून) में सामने आए हैं ।


लोक सभा सांसद मुरारी लाल मीणा द्वारा उठाए गए प्रश्न का जवाब देते हुए, राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) को कॉल की संख्या दिसंबर 2015 में 12,553 से बढ़कर दिसंबर 2024 तक 1,55,138 तक पहुंच गई है, और साधारण मासिक शिकायतें बढ़कर 2017 के औसतन 37,062 से 2024 में 1,11,951 हो गईं हैं।बीआईएस ने वित्तीय वर्ष 2024–25 में दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में ई‑कॉमर्स से जुड़े गोदामों पर कुल 22 छानबीन और जब्ती अभियान चलाए गए थे।
शिकायतों की राज्यवार स्थिति इस प्रकार है:
• उत्तर प्रदेश: 2,335
• महाराष्ट्र: 1,832
• दिल्ली: 1,451
• राजस्थान: 1,267
• कर्नाटक: 1,192
• लद्दाख: केवल 1 मामला ।
कुल मिलाकर 17,562 शिकायतें दर्ज की गईं हैं।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) एवं अन्य विभागों द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं को नियंत्रित करने के लिए कठोर कार्यवाही करने की आवश्यकता है। और इस प्रकार के सामान एक से अधिक बार बेचने पर ऐसे ई-कॉमर्स साइटों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए ताकि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने से बचाया जा सके। हम उपभोक्ताओं से भी अपील करते हैं की सस्ते के चक्कर में ऐसे ई-कॉमर्स साइटों से माल खरीदने की बजाय परंपरागत दुकानों से सामान की खरीदी करें ताकि सस्ते के नाम पर नकली सामान ना पकड़ा दे।


