श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई महानगर पालिका में सत्तासीन होने को तत्पर उबाठा सत्ता में आने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के अंतर्गत अब उबाठा की ओर से उत्तर भारतीय नेताओं से संपर्क किया जा रहा है।


हनुमान चालीसा का विरोध करने वाली उबाठा को यह भी मालूम है कि कॉंग्रेस से गठबंधन करने के कारण हिन्दू समाज भी उससे कट चुका है ऐसे में मुस्लिम वोटों के लिए उसे कॉंग्रेस से गठबंधन किए रहना होगा।
भाषा के नाम पर उत्तर भारतीयों, गुजरातियों को पीटने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से भी उबाठा ने सिर्फ और सिर्फ मराठी मतदाताओं को साधने के लिए गठबंधन किया है।
मुख्यमंत्री पद पाने के लिए हिन्दुत्व को हाशिये पर रखने वाली उबाठा को मालूम है कि मुंबई में गैर मराठी लोगों की जनसंख्या 65 प्रतिशत के करीब है। उनमें भी उत्तर भारतीयों की संख्या 45 प्रतिशत के आसपास है। ऐसे हालात में उत्तर भारतीय समाज की मदद के बगैर मुंबई मनपा के सत्ता की मलाई चाट पाना मुश्किल है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए उबाठा सांसद संजय राऊत पर उत्तर भारतीय नेताओं को पार्टी में लाने की जवाबदारी सौंपी गई है। इसी जवाबदारी के अंतर्गत संजय राऊत के निर्देशानुसार कुछ विभाग प्रमुखो ने अपने अपने इलाके के संभ्रांत, धनाढ्य उत्तर भारतीय नेताओं से संपर्क करना शुरू किया है।
इस मामले पर संजय राऊत से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।


