मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

प्लास्टर ऑफ पेरिस गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध के कारण, पिछले कुछ दिनों से विसर्जन का इंतज़ार कर रहे चारकोपके गणेश राजा का शनिवार को आखिरकार विसर्जन हो गया।


दरबार से अनुमति मिलने के बाद, चरकोपा राजा १७७ दिनों बाद विसर्जन के लिए रवाना हुए। इससे गणेश भक्तों में खुशी का माहौल है और ढोल-नगाड़ों की गड़गड़ाहट के बीच बप्पा को विदाई दी जा रही है। धनुकर वाड़ी स्थित एक सरोवर में चरकोपा राजा का विसर्जन किया जा रहा है।’प्लास्टर ऑफ पेरिस’ से बनी गणेश प्रतिमाओं का प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन प्रतिबंधित था। इस कारण चारकोपके गणेश राजा के विसर्जन में देरी हुई।


‘चरकोपा राजा’ समूह को छोड़कर, अन्य सभी समूहों ने अपनी मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम सरोवरों में किया। हालाँकि, समूह ने अगली सूचना तक गणेश प्रतिमा को मंडप में ही रखने का निर्णय लिया। चारकोपचा राजा का विसर्जन न होने से गणेश भक्तों में बप्पा के विसर्जन को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। हालाँकि, उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, 177 दिनों से मंडप में विराजमान चारकोपके गणेश राजा विसर्जन के लिए रवाना हो गए।चारकोपचा राजा के विसर्जन के पीछे छह महीने का बड़ा संघर्ष था और बप्पा लंबे समय से मंडप में विराजमान होकर न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे थे।
अब न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद, बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक बप्पा के विसर्जन में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों और झांझ-मंजीरों की ध्वनि के बीच और भक्तिमय वातावरण में चारकोपचा राजा का विसर्जन किया गया।


