■ उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लिया शंकराचार्य का आशीर्वाद.
■ भव्य कलश यात्रा के साथ शंकराचार्य का मंडप प्रवेश हुआ.
शैलेन्द्र श्रीवास्तव /मुंबई वार्ता

परमराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि मराठी महाराष्ट्र की प्रांतीय भाषा है। वह बहुत ही समृद्ध है। स्थानीय लोगों का मराठी प्रेम वाकई प्रशंसनीय है। लेकिन किसी को यह भाषा नहीं आती है तो उसको थप्पड़ नहीं मारना चाहिए। इससे मराठी की छवि खराब होगी।


बुधवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बोरीवली पहुंचकर शंकराचार्य का दर्शन किया और उनसे आशीर्वाद लिया। बोरीवली के विधायक प्रकाश सुर्वे और समाजसेवी गणेश नायडू ने भी शंकराचार्य का पूजन किया।


पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में महाराजश्री ने कहा कि मुंबई आकर वे भी मराठी सीखने की इच्छा रखते हैं। वे यहां बोरीवली के कोरा केंद्र मैदान पर आयोजित 60 दिनों के दिव्य-भव्य चातुर्मास्य महोत्सव को सानिध्य प्रदान कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि चातुर्मास्य पूर्ण होने तक उनका प्रयास होगा कि वे कुछ-कुछ मराठी बोलना सीख जाएं। बोरीवली में वजीरा नाका स्थित गणेश मंदिर से निकली विशाल कलश यात्रा को महाराजश्री ने सानिध्य प्रदान किया। इसमें शंकराचार्य के वैदिक गुरुकुलों के लगभग 500 से अधिक विद्यार्थियों, लगभग ढाई हजार कलशधारी महिलाओं और बड़ी संख्या में आम लोगों ने भाग लिया।
ढोल-ताशिए, नगाड़े, बैंडबाजे, तुतारी और लेझिम की धुनों पर झूमते-नाचते और जयघोष लगाते श्रद्धालुओं के बीच शंकराचार्य ने अपने चातुर्मास्य महोत्सव हेतु पावन मंडप प्रवेश किया। इस अवसर पर शास्त्री-आचार्य पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज से अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण बना।आयोजन स्थल पर बने 108 कुंडों के गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ में 33 करोड़ आहुतियां डालने का शंकराचार्य का संकल्प शुक्रवार से आरंभ हो जाएगा।
आयोजन समिति से जुड़े राजकुमार जाजू, अभिषेक जाजू, जयकांत शुक्ला आदि ने कहा है कि मुंबईवासी इस भव्य चातुर्मास्य महोत्सव में पहुंचकर धार्मिकता से जुड़ने और सनातन संस्कृति को आत्मसात करने का लाभ अवश्य लें।


