मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका (BMC) में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सत्ताधारी भाजपा के कामकाज को लेकर राजनीतिक हलकों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। कई वर्षों तक शिवसेना के नियंत्रण में रही BMC पर अब भाजपा का एकछत्र नियंत्रण है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर ही फंड वितरण को लेकर असंतोष उभरता दिख रहा है।


सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के नगरसेवकों के बीच विकास निधि के असमान वितरण को लेकर नाराज़गी बढ़ रही है। आरोप है कि मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम के विधानसभा क्षेत्र के नगरसेवकों को प्राथमिकता देते हुए भारी मात्रा में फंड दिया जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, अमित साटम के करीबी माने जाने वाले रोहन राठोड़ को 9 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है, जबकि अन्य कई नगरसेवकों को 6-6 करोड़ रुपये ही मिले हैं। इससे पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या फंड वितरण में संतुलन नहीं रखा गया और क्या इसमें राजनीतिक नजदीकी और गुटबाजी हावी है।
■ विवादित फंड वितरण (चयनित वॉर्ड):
वॉर्ड 65 – विठ्ठल बंदेरी: 6 करोड़
वॉर्ड 67 – दीपक कोतेकर: 6 करोड़
वॉर्ड 68 – रोहन राठोड़: 9 करोड़
वॉर्ड 69 – सुधा सिंह: 6 करोड़
अनिष मकवाणी: 6 करोड़
सुनीता मेहता: 6 करोड़
इस मुद्दे पर अब भाजपा के भीतर ही आवाजें उठने लगी हैं और पारदर्शिता की मांग की जा रही है। आने वाले समय में यह मामला पार्टी के अंदरूनी विवाद का रूप ले सकता है।
■ MIM को ज्यादा, ठाकरे गुट को कम फंड मिलने पर भी सवाल
कुछ दिन पहले BMC की स्थायी समिति द्वारा करीब 800 करोड़ रुपये के विकास निधि के वितरण को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। इसमें भाजपा ने पूर्व सहयोगी शिवसेना (ठाकरे गुट) के नगरसेवकों को मात्र 25 लाख रुपये दिए, जबकि पहली बार चुने गए AIMIM के 8 नगरसेवकों को 2 से 3 करोड़ रुपये तक का फंड आवंटित किया गया।
इस असमान वितरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हैरानी जताई गई और विपक्ष ने भाजपा पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों पर अमित साटम या भाजपा नेतृत्व की ओर से क्या सफाई दी जाती है।


