■ संघ-भाजपा द्वारा पाले-पोसे गए नफरत के वृक्ष पर अब सुरज शुक्ला जैसे ज़हरीले फल लगने लगे हैं। यह विषवृक्ष देश के लिए घातक बन चुका है।
मुंबई वार्ता संवाददाता

पुणे रेलवे स्टेशन परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर कोयते से हमला किया गया। यह हमला सिर्फ एक मूर्ति पर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा पर किया गया घाव है। हमलावर सुरज शुक्ला को एक ‘पागल’ या ‘मानसिक रूप से असंतुलित’ व्यक्ति बताकर मामले को छोटा करने की कोशिश होगी। लेकिन हकीकत यह है कि वह संघ और भाजपा द्वारा वर्षों से बोए जा रहे नफरत के बीजों से उपजे ज़हरीले वृक्ष का एक फल है।इस विषवृक्ष का असर आज पूरे देश के लिए ख़तरनाक बन गया है। अब इसका बंदोबस्त करना अनिवार्य है, ऐसा तीखा प्रहार महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया है।
इस घटना की तीव्र निंदा करते हुए सपकाल ने कहा कि महात्मा गांधी केवल स्वतंत्रता संग्राम के नेता नहीं थे, बल्कि भारत की नैतिक आत्मा के शिल्पकार थे। सत्य, अहिंसा, धर्मनिरपेक्षता और सर्वसमावेशी विचारधारा गांधीजी की देन है, जो भारतीय लोकतंत्र की नींव में समाहित है।गांधीजी ने धार्मिक सद्भाव, सह-अस्तित्व और सामाजिक समता पर हमेशा विश्वास रखा। आज पूरी दुनिया उनके विचारों से प्रेरणा लेती है, विश्वभर में उनके पुतले स्थापित हैं।लेकिन देश में कुछ कट्टरपंथी विचारधाराएं और संगठन गांधीजी के विचारों से चिढ़ते हैं, उनके प्रति नफ़रत रखते हैं। इसी नफ़रत के कारण महात्मा गांधी की हत्या की गई थी। और 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, तभी से ऐसी अपप्रवृत्तियों को खुला संरक्षण और समर्थन मिलने लगा।सरकारी छत्रछाया में इन संगठनों ने महात्मा गांधी का चरित्रहनन शुरू किया और नाथूराम गोडसे का महिमामंडन करने लगे। यहीं माहौल सुरज शुक्ला जैसे ज़हर भरे लोगों को तैयार कर रहा है।
सपकाल ने मांग की कि इस हमलावर पर केवल साधारण आपराधिक धाराओं में नहीं, बल्कि UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए ताकि ऐसे लोगों को सबक मिले और कोई फिर दोबारा ऐसी हिम्मत न करे।उन्होंने कहा गांधीजी की हत्या से उनके विचार नहीं मिट सके, तो एक पुतले पर वार करने से भी गांधीवाद को खत्म नहीं किया जा सकता।नाथूराम गोडसे की विचारधारा विनाश का रास्ता है,जबकि गांधीजी का रास्ता ही इस देश की दिशा है और यही सत्य है।


