ठेकेदार की मिलीभगत से ही बोरीवली नाले में हुई डंपिंग!दिखावे की कार्रवाई, ठेकेदार पर लगा 1 लाख का जुर्माना।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई के बोरीवली पश्चिम में पी.एल. देशपांडे उद्यान के पास स्थित नाले में कंस्ट्रक्शन से संबंधित मलबा डंपिंग मामले में नाले सफाई ठेकेदार की मिलीभगत का मामला उजागर हो सकता है।

ज्ञात हो कि उक्त नाले में कंस्ट्रक्शन से संबंधित मलबा डंपिंग करने का मामला प्रकाश में आने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई महानगर पालिका(बीएमसी) को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। हालाकि काफी समय बीतने के बाद बीएमसी ने ठेकेदार पर रू एक लाख की दंडात्मक कार्रवाई की है।

■ क्या है पूरा खेल ?

इस नाले को साफ़ करने का ठेका पिछले साल उसी कंपनी को दिया गया है जिसे बीएमसी ने ब्लैक लिस्टेड कर रखा था। हालाकि इस साल मार्च में नाले सफाई का ठेका धीरज इंटर प्राइजेज को दिया गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस कंपनी ने ही किसी साइट से मलबा लाकर स्वयं ही उक्त नाले में फिकवाया है। अब इस फेंके हुए मलबे को वह साफ़ करने के नाम पर बीएमसी से मोटा रुपया वसूलेगी। अर्थात खुद ही मलबा नाले में फेंको और फिर खुद ही उस मलबे को साफ़ करने के नाम पर बीएमसी अधिकारियों के माध्यम से मोटी रकम वसूली करो। फिर इस काली कमाई में स्थानीय बीएमसी कर्मचारियों का भी हिस्सा लगाया जाता है।

इस गोरखधंधे में स्थानीय बीएमसी कर्मचारियों की मिलीभगत है। ऐसा पहले भी होता रहा है। शिकायत मिलने पर संबंधित वाहन ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा किया जाता रहा है। इस बार भी कार्रवाई के नाम पर ठेकेदार धीरज इंटर प्राइजेज पर रू एक लाख का दंड लगाया है जबकि इस ठेकेदार को भी ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिए था।

इस बार भ्रष्टाचारियो का सामना एक ईमानदार और कर्मठ विधायक से हुआ है। विधायक संजय उपाध्याय ने न सिर्फ नाले में डंपिंग करने वाले की छानबीन करने अपितु मामले में शामिल सभी संबंधित लोगों पर कार्रवाई का आदेश दिया है।

ज्ञात हो कि एम.बी.ब्रदर्स कंपनी को पहले मीठी नदी की सफाई का ठेका भी दिया गया था। वहां भी काफी अनियमितताओ को देखने के बाद बीएमसी ने एम.बी.ब्रदर्स को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। आश्चर्य की बात है कि एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी को फिर से अनियमितता करने के लिए पिछले साल नाले सफाई का ठेका आवंटित किया गया था। हालाकि इस साल नाले सफाई का ठेका इस कंपनी से लेकर धीरज इंटर प्राइजेज को दे दिया गया है,लेकिन खेल वहीं पुराना चल रहा है।

हद तो तब हो जाती है जब एक साफ़ सुथरे नाले में डंपिंग कर उसे बदहाल किया जाता है और फिर साफ़ करने का दिखावा कर जनता के करोड़ों रुपयों की खुले आम लूट होती है।

अब देखना यह है कि स्थानीय विधायक संजय उपाध्याय किस स्तर तक इस भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं? धीरज इंटर प्राइजेज जैसी कंपनी को क्या बीएमसी के काम से बेदखल किया जा सकेगा? या फिर मात्र एक लाख की दंडात्मक कार्रवाई का दिखावा कर पूरे मामले पर लीपापोती की जाती है ?

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