मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगर क्षेत्र के मीरा-भायंदर में ऑटो-रिक्शा परमिट आवंटन में कथित अनियमितताओं के बीच एक परिवहन विभाग के अधिकारी को धमकी मिलने का मामला सामने आया है।


सब-रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) मीरा रोड से जुड़े निरीक्षक प्रसाद नलावडे को रविवार को एक अज्ञात कॉलर ने फोन कर खुद को Lawrence Bishnoi gang से जुड़ा बताते हुए धमकी दी। उस समय नलावडे बेंगलुरु में थे। मुंबई लौटने के बाद उन्होंने काशीगांव पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई।


पुलिस के अनुसार, नलावडे की शिकायत के आधार पर गैर-संज्ञेय (NC) अपराध दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल बेंगलुरु से किया गया था, इसलिए आगे की जांच वहां की पुलिस को सौंपी जाएगी।
सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर राहुल पाटिल ने स्पष्ट किया कि कॉलर की धमकी केवल परमिट जारी करने के मुद्दे तक सीमित थी और इसमें ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्यता जैसे विवादित विषय का उल्लेख नहीं था।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मीरा-भायंदर क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऑटो-रिक्शा परमिट हासिल किए जाने के आरोप लग रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने परमिट की समीक्षा के आदेश दिए हैं और कहा है कि ड्राइवरों को मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार किसी भी धमकी से डरने वाली नहीं है और पहले मीरा-भायंदर में इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा, इसके बाद पूरे महाराष्ट्र में इसे लागू किया जाएगा।
हालांकि, इस फैसले का ऑटो-रिक्शा चालकों के कुछ संगठनों ने विरोध किया है और मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के खिलाफ हड़ताल की चेतावनी दी है। बावजूद इसके, सरकार ने साफ कर दिया है कि ड्रग्स, फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दबाव में नहीं आएगी।


