मुंबई वार्ता संवाददाता

सर्वोच्च न्यायालय की इलाहाबाद न्यायालय पर की गयी टिप्पणी सुनकर, महिलाओं के मन में उठे अविश्वास और असुरक्षा का तूफान शांत हो गया। यह बाते भाजपा विधायक एवं महिला प्रदेशाध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ ने कही है।
चित्रा वाघ ने कहा कि,”इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले अपने आदेश में कहा था कि किसी लड़की के स्तनों को हाथ लगाना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना , उसके खिलाफ बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस फैसले से हर एक महिला को, जिसमें मैं भी शामिल हूं, हमें बहुत दुख हुआ। मन को क्लेश हुआ। इस निर्णय के विरुद्ध पूरे देश में गुस्से की लहर देखी। लेकिन अंततः हमारे संविधान की जीत हुई।माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस आदेश की कड़ी आलोचना की है।”
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, “यह निर्णय निर्णयकर्ता की ओर से संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। हम इसे देखकर दुखी हैं। यह निर्णय तुरंत नहीं दिया गया, बल्कि 4 महीने की अवधि के बाद दिया गया। पैराग्राफ 21, 24 और 26 में बताए गए बिंदु कानून के अनुसार नहीं हैं और मानवता की कमी को दर्शाते हैं। हम इन पैराग्राफ में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाते हैं।”
चित्रा वाघ ने कहा कि,”आदरणीय भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी ने प्रत्येक नागरिक को कानून का संरक्षण दिया है। देश की महिलाओं के लिए कानून का यह अभेद्य, अजेय कवच उनके आत्मसम्मान और अस्मिता को अबाधित रखेगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका ने निश्चित रूप से इस निराशादायक बादलों को दूर कर दिया है।इसके लिए मैं सभी महिलाओं की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय को धन्यवाद देती हूं।”


