श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाका मामले के दोषी अबू सलेम की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मुंबई की विशेष TADA अदालत में स्पष्ट कहा कि सलेम को उस पर लगाए गए ₹16.51 लाख के जुर्माने का भुगतान करना ही होगा। यदि वह जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे अदालत द्वारा निर्धारित करीब 18 वर्ष की अतिरिक्त सजा (डिफॉल्ट सेंटेंस) भी भुगतनी पड़ेगी।


अबू सलेम ने अदालत में याचिका दाखिल कर जुर्माने और उससे जुड़ी अतिरिक्त सजा को लेकर स्पष्टता मांगी थी। उसका कहना था कि जेल प्रशासन ने उसे बताया है कि जुर्माना नहीं भरने पर उसकी कैद की अवधि और बढ़ जाएगी।


CBI ने अदालत में दलील दी कि सलेम को विभिन्न मामलों में सुनाई गई सजा के तहत लगाया गया जुर्माना नियमानुसार अदालत की रजिस्ट्री में जमा करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो कानून के अनुसार जुर्माना अदा न करने की स्थिति में निर्धारित अतिरिक्त कारावास की सजा भी लागू होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष TADA अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत अब इस याचिका पर आगे की सुनवाई में निर्णय करेगी कि जुर्माने और डिफॉल्ट सजा के संबंध में क्या आदेश दिया जाए।


