मुंबई वार्ता संवाददाता

नियमों के अनुसार किसी भी फ्लाईओवर की संरचनात्मक जांच 25 वर्ष बाद की जाती है, लेकिन सांताक्रुझ–चेंबूर लिंक रोड (एससीएलआर) पर बने तीन फ्लाईओवर महज 12 साल में ही जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने वर्ष 2024 में इनके संरचनात्मक परीक्षण और मरम्मत का निर्णय लिया था। हालांकि अब तक केवल संरचनात्मक जांच पूरी हुई है, जबकि मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है।


यह लिंक रोड मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा निर्मित किया गया था और 2012 में यातायात के लिए खोला गया। अप्रैल 2015 में इसे महानगरपालिका को सौंपा गया। 6.45 किलोमीटर लंबे और 45.7 मीटर चौड़े इस मार्ग पर तीन प्रमुख फ्लाईओवर हैं—सीएसएमटी रोड फ्लाईओवर, कुर्ला–कलिना फ्लाईओवर और टिळकनगर का डबल डेकर फ्लाईओवर। ये फ्लाईओवर लोकमान्य तिलक टर्मिनस, कुर्ला डेयरी तथा अमर महल जंक्शन होते हुए मार्ग को ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ते हैं।
2012 से अब तक एससीएलआर पर किसी बड़ी मरम्मत का काम नहीं किया गया। वर्ष 2024 में रेलवे प्रशासन और महानगरपालिका के एम पश्चिम वार्ड के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया, जिसमें फ्लाईओवरों की मरम्मत आवश्यक पाई गई। निरीक्षण में गर्डर में दरारें, फुटपाथ की खराब हालत, टूटे यूपीवीसी पाइप, आसपास उगी झाड़ियां और कई स्थानों पर जंग लगने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं।
स्थिति के आकलन के लिए महानगरपालिका ने विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त किया था। उनके माध्यम से संरचनात्मक जांच पूरी कर ली गई है। पुल विभाग के सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य प्रस्तावित है और इसके लिए निविदा भी जारी की जानी है। हालांकि, मरम्मत कब शुरू होगी, इसे लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।
नियमों के अनुसार संरचनात्मक जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि पुल को आगे कितने अंतराल पर रखरखाव और मरम्मत की आवश्यकता होगी। लेकिन एससीएलआर के फ्लाईओवरों की कम समय में खराब होती हालत ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर मरम्मत कार्य में देरी क्यों हो रही है और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।


