हाईकोर्ट के निर्देश पर दादर कबूतर खाना बंद किए जाने से लाखों कबूतरों के अस्तित्व पर गहराया संकट।

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■ वरिष्ठ हिंदू वादी नेता बाबूभाई भवानजी ने कबूतरों की जान बचाने के लिए दिए अहम सुझाव ।

मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की निवासी बस्तियों में चबूतरे (कबूतर खाना) को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दादर पश्चिम स्थित कबूतर खाना बीएमसी द्वारा प्रतिबंधित कर दिए जाने के बाद लाखों कबूतरों का दाना-पानी बंद होने से उनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जिसे लेकर जीवदया प्रेमियों में तीव्र आक्रोश व असंतोष व्याप्त है। इसको बचाने के लिए सभी जाति-धर्म के सनातनी हिंदू लामबंद हो गए हैं, और वे बुधवार को सुबह 10 बजे दादर पश्चिम के कबूतर खाने के समक्ष एकत्रित होकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करेंगे, यह जानकारी मुंबई महानगर पालिका के पूर्व उपमहापौर तथा वरिष्ठ हिंदू वादी नेता बाबूभाई भवानजी ने दी है।

उन्होंने कहा कि हर एक भारतीय को सिखाए गए संस्कार चिड़िया को दाना, कुत्ते को रोटी, और जानवरों को चारा, यह भारत की जीयो ओर जीने वाली संस्कृति है। पृथ्वी पर रहने वाले प्राणीमात्र का यह मौलिक अधिकार है। एक-दूसरे की मदद करना यह संस्कार है, इंसानियत का धर्म है यह हमारी परंपरा है।

भवानजी ने कहा कि हर समस्या का कोई न कोई हल होता है। मुंबई के चारों और समुद्र किनारा है। वहां वहां बस्ती के दूर जैसे कि कोलाबा, नरीमन पॉइंट, गिरगांव, मलबार हिल, हाजी अली, वर्ली, दादर, महिम, बांद्रा, जुहू, अंधेरी से दहिसर, वडाला से वाशी तक कबूतरों को दाना-पानी उपलब्ध कराने के लिए चबूतरे पूरी प्लानिंग से बनाए जाने चाहिए, जिससे हमारी परंपरा, संस्कार, धार्मिक भावना जीवंत बनी रहे।

उन्होंने कहा कि जबतक नए चबूतरे तैयार नहीं हो जाए तबतक बिचका रास्ता निकला जाए और इन चबूतरों में कबूतरो को दाना-पानी देने का समय दोपहर 2 से 4. 30 का रखा जाए, तो लोगों को सुविधा होगी, और किसी को किसी प्रकार की असुविधा भी नहीं होगी। भाजपा के वरिष्ठ हिंदुवादी नेता व पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी धर्मालयों, मंदिरों,में और उनकी मकानो की की छतों पर भी भूखे- प्यासे कबूतरों को दाना-पानी उपलब्ध करवाकर भी उनकी जान बचाई जानी चाहिए।

भवानजी ने कहा कि दादर का कबूतर खाना हेरिटेज है, 135 साल पुराना ब्रिटिश काल का है। कोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसे निर्देश से कबूतरोकी जान लेना पूरी तरह से अनुचित है, इस पर महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी प्रशासन को गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की जरूरत है।

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