राजन बलसाने/ मुंबई वार्ता

विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के युवा लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बनाने में छात्रों की भागीदारी अहम भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में धुलिया की पृथ्वी आप्पा करंदे ने जर्मनी के स्टुटगार्ट के पास फोरजिम सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बायोटेक्नोलॉजी कार्यशाला में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
इस कार्यशाला में 30 देशों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। पृथ्वी करंदे की प्रारंभिक शिक्षा आर. के. चितले माध्यमिक विद्यालय, धुलिया में हुई, और वर्तमान में वह पुणे के मॉडर्न साइंस कॉलेज में एमएससी (बायोटेक्नोलॉजी) के दूसरे वर्ष की छात्रा है। पृथ्वी विख्यात शिक्षक आप्पा करंदे की पुत्री हैं। उनके इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे धुले शहर को गर्व की अनुभूति हुई है।


