मुंबई वार्ता संवाददाता

अंबरनाथ में कांग्रेस के 12 नगरसेवकों द्वारा किसी से भी चर्चा किए बिना लिया गया निर्णय अत्यंत गलत था। यह बात पार्टी के संज्ञान में आते ही उन्हें कड़ी फटकार देते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। कांग्रेस ने तत्काल कार्रवाई की, लेकिन भाजपा ने उन नगरसेवकों को अपने दल में शामिल कर लिया। इससे भाजपा का दोहरा चेहरा उजागर हो गया है। सत्ता के लिए भाजपा किसी भी दल से गठजोड़ करने को तैयार है। अकोट में भाजपा ने ओवैसी की MIM के साथ गठबंधन किया है, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


महानगरपालिका चुनाव प्रचार के सिलसिले में जालना में आयोजित सभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अंबरनाथ नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा और शिंदे सेना के खिलाफ चुनाव लड़ा और 12 नगरसेवक निर्वाचित हुए। इसके बावजूद भाजपा ने “अंबरनाथ विकास आघाड़ी” बनाने के लिए अपने पार्टी लेटरहेड पर पत्र जारी किया। कांग्रेस ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और केवल एक बयान देकर मामले को टाल दिया।


भाजपा के कथन और आचरण में भारी अंतर है। इस तरह की अनैतिक गठजोड़ करते समय और कांग्रेस के नगरसेवकों को अपने दल में शामिल करते समय भाजपा को शर्म आनी चाहिए। “कांग्रेस मुक्त भारत” के नारे के पीछे भागते-भागते भाजपा खुद “कांग्रेस युक्त” हो गई है, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने लातूर में विलासराव देशमुख के बारे में जो बयान दिया, उससे उनके भीतर सत्ता का घमंड साफ दिखाई देता है। महाराष्ट्र के विकास में विलासराव देशमुख का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन भाजपा महाराष्ट्र के लिए योगदान देने वाले नेताओं के नाम मिटाना चाहती है। शिवराज पाटील चाकूरकर, प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और शंकरराव चव्हाण जैसे नेताओं के नाम भी भाजपा मिटाना चाहती है।
नांदेड की सभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अशोक चव्हाण के सामने ही यह कहा कि नांदेड में 70 वर्षों में कोई नियोजन नहीं हुआ, कोई विकास नहीं हुआ—यानी उन्होंने अशोक चव्हाण के मुंह पर ही उन्हें नालायक कह दिया। भाजपा की इस मानसिकता को पहचानिए। भाजपा शिव, शाहू, फुले और आंबेडकर के विचारों को भी मिटाना चाहती है। ऐसे अहंकारी भाजपा को जनता को सबक सिखाना चाहिए, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में सत्ताधारी दल के नगरसेवक निर्विरोध चुने जा रहे हैं। यह उनकी लोकप्रियता के कारण नहीं, बल्कि दबाव, धमकी और पैसों के लालच के कारण हो रहा है। निर्विरोध चुनाव कराने में सत्ताधारी दल को पुलिस, प्रशासन और चुनाव आयोग की भी मदद मिलती दिखाई दे रही है। यह निर्विरोध चुनावों की प्रवृत्ति अत्यंत घातक है और यह लोकतंत्र तथा संविधान पर बड़ा खतरा है।
पत्रकार परिषद में सांसद डॉ. कल्याण काले, विधायक राजेश राठोड, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र राख, जिला अध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।


